सूखा मानसून और अल नीनो का दोहरा वार, रबी फसलों पर गहराया संकट
भारत में रबी की फसल के मौसम की शुरुआत अच्छी नहींं रही है। इस साल मानसून की बारिश में 12.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई है, जो 2001 के बाद से चौथा सबसे कम आंकड़ा है।
कम बारिश के कारण खेतों में नमी घट गई है, और आशंका है कि नवंबर 2026 तक अल नीनो का असर और तेज हो जाएगा। इन दोनों वजहों से किसानों को गेहूं, चना और ज्वार जैसी फसलें की बुवाई और उनकी पैदावार बढ़ाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
गेहूं, चना और ज्वार जोखिम में
जलाशयों में पानी का स्तर पहले से ही औसत से 1 फीसदी कम हो गया है, जिससे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों में चिंता बढ़ गई है। गेहूं के ज्यादातर खेतों में तो सिंचाई की सुविधा मौजूद है, लेकिन चना और ज्वार जैसी फसलें को इतनी सिंचाई नहींं मिल पाती।
अगर पानी की कमी ऐसे ही बनी रही, तो कई किसानों को बुवाई में देरी करनी पड़ सकती है या फिर इस मौसम में उन्हें अपनी फसल की पैदावार कम करनी पड़ सकती है।