अब वंदे मातरम के अपमान पर होगी जेल की सजा, राज्यसभा में विधेयक ध्वनि-मत से पारित
क्या है खबर?
राज्यसभा ने बुधवार को राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का अपमान करने को अपराध बताने वाला विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया है। इस दौरान विपक्ष की उपस्थिति नहीं थी। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को मानसून सत्र की शुरूआत में सदन में पेश किया था, जिस पर पिछले हफ्ते गतिरोध के कारण चर्चा नहीं हो पा रही थी। बुधवार को 2 बार लगातार सदन स्थगन के बाद इसे पारित किया गया।
चर्चा
सदन में हंगामे के बीच हुई चर्चा, विपक्ष का वॉकआउट
विधेयक पर बुधवार को चर्चा शुरू हुई, लेकिन विपक्षी दल दिल्ली में छात्रों पर 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज के विरोध में नारेबाजी कर रहे थे।
विपक्षी सांसदों की मांग थी कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर जवाब दें। हालांकि, प्रदर्शन के बावजूद उपसभापति ने कार्यवाही जारी रखी और सदस्यों से चर्चा में भाग लेने का आग्रह किया।
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले के विधेयक पर बोलते समय विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।
कानून
क्या है राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2026?
केंद्र ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन पेश किया था।
संशोधन 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने पर इसे राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच आया है।
संशोधन से राष्ट्रीय सम्मान के अपमान का प्रावधानों 'राष्ट्रगान' के साथ 'वंदे मातरम' पर भी लागू होगा।
अब राष्ट्रगान की तरह 'वंदे मातरम' का जानबूझकर अपमान सजा दिलाएगी। अभी तक 'वंदे मातरम' के अपमान पर सजा का प्रावधान नहीं था।
कानून
वंदे मातरम का अपमान करने पर क्या होगी सजा?
राज्यसभा ने जो संशोधन विधेयक पारित किया है, उसमें 'वंदे मातरम' को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव नहीं, बल्कि उसके गायन को रोकना या जानबूझकर अपमान करने पर 3 साल की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
जनवरी में गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसके बाद से सभी कार्यक्रमों और स्कूलों में इसका गायन हो रहा है।
विधेयक पारित होने से 'वंदे मातरम' को अधिक मान्यता और कानूनी संरक्षण मिलेगा।
प्रावधान
विधेयक के प्रमुख प्रावधान क्या हैं?
विधेयक में राष्ट्रगीत के गायन और सम्मान में दिशा-निर्देश और नियम बनाए गए हैं।
इसमें सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत से पहले राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य होगा।
गायन में सभी 6 अंतरों को पूरा गाया आवश्यक होगा।
राष्ट्रगीत को 3 मिनट और 10 सेकंड में संपन्न करना होगा।
सभी लोगों को सम्मानपूर्वक 'सावधान' की मुद्रा में खड़ा होना होगा।
इसी तरह सभी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा से पहले वंदे मातरम गाना अनिवार्य करना भी प्रस्तावित है।
विधेयक
क्या है राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971?
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 को 23 दिसंबर, 1971 को पारित किया गया था। इसका उद्देश्य देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान रोकना है।
यह कानून राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा), भारत के संविधान और राष्ट्रगान (जन गण मन) के अपमान को रोकने के लिए बनाया गया था।
कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करना और नागरिकों में देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देना है।
कानून के उल्लंघन अपमान पर अधिकतम 3 साल की जेल और जुर्माना है।
जानकारी
1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था वंदे मातरम
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 'वंदे मातरम' 1875 में लिखा, जिसे 1882 में अपने उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित किया। यह सबसे पहले 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने गाया, जो बाद में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक शक्तिशाली नारा बन गया।