उम्रकैद वाले बेअदबी कानून पर अकाल तख्त का 'इनकार', पंजाब सरकार की बढ़ी मुश्किलें
पंजाब ने अप्रैल 2026 में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी को रोकने के लिए एक कड़ा कानून बनाया है। इस कानून के तहत, अगर कोई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करता है, तो उसे उम्रकैद और भारी जुर्माना दोनों की सजा मिल सकती है।
हालांकि, सिख धर्म की सबसे बड़ी संस्था, अकाल तख्त ने जब इस कानून पर अपनी चिंताएं जताईं, तो सरकार ने उन्हें 26 पन्नों का जवाब भेजा। अकाल तख्त के मीडिया सलाहकार जसकरण सिंह ने इस जवाब को नाकाफी बताया।
कार्यवाहक जत्थेदार ने 'संरक्षक' क्लॉज हटाने की मांग की
अकाल तख्त कानून में 'संरक्षक' शब्द की परिभाषा से संतुष्ट नहीं है। उनका मानना है कि यह सिख मान्यताओं के खिलाफ है। कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने इन प्रावधानों को हटाने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने सेवादारों की सुरक्षा के लिए भी कानून बनाने, बेअदबी के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन करने और श्रद्धालुओं के लिए साफ सुरक्षा प्रावधानों की वकालत की है।
पंजाब में अगस्त में कानून पर होगी चर्चा
पंजाब सरकार ने आने वाले विधानसभा सत्र में, जो 3 से 10 अगस्त के बीच होगा, इस कानून में बदलावों पर चर्चा करने का फैसला किया है। लेकिन अकाल तख्त का साफ कहना है कि सरकार अकेले इन बदलावों पर फैसला नहीं कर सकती। उसका मानना है कि कोई भी संशोधन मिलकर ही होना चाहिए। अकाल तख्त की मांग है कि पहले एक संयुक्त समिति बनाई जाए जो पूरे मामले की समीक्षा करे।