भीख मांगने पर गिरफ्तारी से जुड़े कानून को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती
बॉम्बे हाई कोर्ट में एक नई जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट, 1960 कानून को चुनौती दी गई है। यह PIL 'सेंटर फॉर प्रमोटिंग डेमोक्रेसी' नाम के संगठन ने दायर की है।
इस याचिका में कहा गया है कि यह कानून उन लोगों को गलत तरीके से निशाना बनाता है, जो गरीबी, बेघर और असहाय स्थिति में रहते हैं। आसान भाषा में कहें तो, यह कानून अधिकारियों को सिर्फ उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति के आधार पर गिरफ्तार करने और हिरासत में लेने की शक्ति देता है। संगठन का कहना है कि यह बात हमारे संविधान में दिए गए मूल अधिकारों के खिलाफ है। साथ ही, यह अधिकारियों को बहुत ज्यादा और बेहिसाब ताकत देता है।
याचिका में कहा गया- कानून हाशिए पर पड़े समुदायों को निशाना बनाता है
याचिका में बताया गया है कि यह कानून हाशिए पर पड़े समुदायों पर सबसे ज़्यादा असर डालता है। खासकर बेघर लोगों और विमुक्त और घुमंतू जनजातियों (DNT) के सदस्यों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। याचिका में बोरीवली के एक हालिया मामले का भी जिक्र किया गया है। वहां अनौपचारिक क्षेत्र के मजदूरों को इस कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था, जबकि उन्हें रिहाई मिल चुकी थी।
PIL में इस कानून को पुराना और कठोर बताया गया है। इसमें कहा गया है कि यह कानून 'केंद्र सरकार की उस नीति को अनदेखा करता है, जो भीख मांगने वाले लोगों का पुनर्वास और उन्हें समाज में फिर से शामिल करने की बात करती है।' याचिका के अनुसार, यह कानून लोगों के सम्मान, समानता और सामाजिक न्याय को कमजोर करता है।