मोदी ने जेरूसलम में 'याद वाशेम' का दौरा किया, इजरायल के लिए कितनी खास है जगह?
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को अपने इजरायल दौरे के दूसरे दिन जेरूसलम में बने 'याद वाशेम' पहुंचे, जो दुनिया का सबसे बड़ा होलोकॉस्ट संग्रहालय और स्मारक है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी थे। मोदी ने यहां होलोकॉस्ट पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और पवित्र अग्नि के फेरे लिए। संग्रहालय में मोदी ने इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग के साथ एक पौधा भी लगाया। इजरायल के लिए संग्रहालय और स्मारक का क्या महत्व है? आइए, जानते हैं।
स्मारक
60 यहूदियों की स्मृति में बनाया गया है संग्रहालय
याद वाशेम को 1953 में इजरायली संसद (नेसेट) द्वारा बनाया गया था। इस स्मारक-संग्रहालय को बनाने का उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी जर्मनी और उनके सहयोगियों द्वारा नरसंहार में मारे गए 60 लाख यहूदियों की स्मृति को संरक्षित करना, उनकी कहानियां दर्ज करना और भविष्य में ऐसे नरसंहार को रोकने के लिए जागरूकता फैलाना है। यहां नरसंहार से जुड़ी व्यक्तिगत वस्तुएं, फोटो, गवाही, वीडियो और कलाकृतियां हैं और 50 लाख से ज्यादा पीड़ितों के नामों का संग्रह है।
खासियत
याद वाशेम की खासियत क्या है?
संग्रहालय और स्मारक को हिब्रू भाषा में 'याद वाशेम' नाम दिया गया है। इसका शाब्दिक अर्थ "स्मृति और नाम" है। यह नाम बाइबिल (पुराने नियम) की किताब से लिया गया है। जेरूसलम के स्मरण पर्वत (हर हज़िक्रोन) पर स्थित याद वाशेम लगभग 45 एकड़ में फैला है। इसका संग्रहालय एक लंबी, त्रिकोणीय कंक्रीट संरचना है, जो पहाड़ी से गुजरती है। इसमें 200 मीटर लंबी छत की खिड़की से रोशनी आती है, जो आशा का प्रतीक है। संग्रहालय ज्यादातर भूमिगत है।
ट्विटर पोस्ट
प्रधानमंत्री मोदी ने याद वाशेम में श्रद्धांजलि दी
#WATCH | Jerusalem, Israel: Prime Minister Narendra Modi and Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu visit Yad Vashem - The World Holocaust Remembrance Centre in Jerusalem.
— ANI (@ANI) February 26, 2026
PM Modi paid tribute to Holocaust victims here.
(Source: Reuters) pic.twitter.com/BGas3j94ir