प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान-किर्गिस्तान दौरे पर रवाना, SCO शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की अपनी 2 देशों की यात्रा पर रवाना हो गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस 4 दिवसीय दौरे के दौरान राजनयिक संपर्क मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री सबसे पहले उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर 2 दिवसीय द्विपक्षीय यात्रा के लिए ताशकंद जाएंगे। उनका यह चौथा उज्बेकिस्तान दौरा है। इसके बाद वे किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक जाएंगे।
बयान
प्रधानमंत्री बोले- यात्रा हमारे सभ्यतागत जुड़ाव को गहरा करेगी
प्रधानमंत्री ने कहा, "हाल के वर्षों में भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी में काफी प्रगति हुई है। मैं राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा, ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने तथा 'विकसित भारत' और 'यांगी उज्बेकिस्तान' के साझा विजन को आगे बढ़ाने पर चर्चा के लिए उत्सुक हूं।"
उन्होंने आगे कहा, "मुझे विश्वास है कि यह यात्रा इस क्षेत्र में हमारे सभ्यतागत जुड़ाव को गहरा करेगी और शांति, स्थिरता और समृद्धि की साझा कोशिशों को आगे बढ़ाएगी।"
उज्बेकिस्तान
कैसा रहेगा प्रधानमंत्री का दौरा?
राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा के लिए ताशकंद जाएंगे। यहां वे कई द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। वे शास्त्री स्मारक और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में स्थित महात्मा गांधी केंद्र भी जाएंगे।
इसके बाद वे बिश्केक जाएंगे, जहां वे 26वें SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जो संगठन की एक चौथाई शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।
SCO
SCO को लेकर प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत 2017 से SCO का एक सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है। मैं सुरक्षा, संपर्क और अवसर पर आधारित क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने और आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के प्रकोप से मुक्त क्षेत्र के लिए साथी सदस्यों के साथ काम करने के लिए तत्पर हूं, जो हमारे पड़ोस और उससे परे शांति और स्थिरता के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं। मैं SCO नेताओं से मिलने के लिए उत्सुक हूं।"
प्लस
ताशकंद में हुआ था पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री का निधन
1965 के युद्ध के बाद 10 जनवरी, 1966 को ताशकंद में भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ था। इसमें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब शामिल हुए थे। सोवियत संघ के प्रधानमंत्री एलेक्सी कोसिगिन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
इस समझौते के ठीक बाद 11 जनवरी, 1966 की रात को ताशकंद में ही प्रधानमंत्री शास्त्री का रहस्यमयी परिस्थितियों में निधन हो गया था।