प्रधानमंत्री युवाओं से बोले- हमें आप पर भरोसा है, देश को आपकी जरूरत
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। दिल्ली में हुए युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद ये पहली बार है, जब प्रधानमंत्री जेन-जी को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हर पीढ़ी की अपनी चुनौतियां और जिम्मेदारियां होती हैं। इस पीढ़ी के लिए आने वाला समय और बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसलिए यह समझें कि अगले 35 साल में आपका काम विकसित भारत का आधार होगा।"
बयान
प्रधानमंत्री बोले- आप जो करेंगे, वह विकसित भारत का आधार होगा
प्रधानमंत्री ने कहा, "आप सभी जानते हैं कि हर पीढ़ी अपने समय की विशिष्ट चुनौतियों का सामना करती है और अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी निभाती है। अगले 30 से 35 वर्षों में आप जो कुछ भी करेंगे, वह 'विकसित भारत' की ओर हमारी यात्रा को प्रभावित करेगा। इसलिए, आपके द्वारा लिए गए हर निर्णय का आधार यह होना चाहिए: इससे देश को क्या लाभ होगा? इससे देश की कौन सी जरूरतें पूरी होंगी?"
सफल
जो सीखते रहेंगे, वहीं सफल होंगे- प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा, "वैश्विक रणनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहा है। तकनीकी प्रगति की गति के कारण वैश्विक शक्ति संतुलन लगातार विकसित हो रहा है। कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि अगले 20 या 30 वर्षों में दुनिया कैसी होगी। दुनिया, प्रौद्योगिकी, उद्योग और पेशे सभी विकसित होंगे। इन सबके बीच एक बात याद रखें: जो सीखते रहेंगे, वही सफल होंगे। सिर्फ सवाल न पूछें और उनके समाधान भी खोजें।"
मजाकिया अंदाज
प्रधानमंत्री ने मजाक में कहा- मैं बागेश्वर बाबा तो नहीं
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री का मजाकिया अंदाज भी देखने को मिला।
उन्होंने कहा, "छात्रों सहित आज कई लोग इस कार्यक्रम में मौजूद हैं, लेकिन मन के किसी कोने में कुछ और चल रहा होगा। मैं तो बाबा बागेश्वर नहीं हूं, लेकिन कुछ तो चलता होगा।"
उनकी ये बाद सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग खिलखिलाकर हंस पड़े।
उन्होंने आगे कहा, "हर किसी का रास्ता अलग, सपना अलग है। इसके बावजूद एक एहसास ऐसा है जो सभी के मन में एक होगा।"
बड़ी बातें
प्रधानमंत्री के संबोधन की बड़ी बातें
जब भी आपके सामने बड़ी चुनौती आए, तो घबराएं नहीं, उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लें।
जो नई चुनौतियों के लिए नए समाधान खोजने का साहस रखते हैं, वे चुनौतियों को अवसरों में बदल देंगे।
छात्र जीवन और असल जिंदगी में बहुत अंतर होता है। IIT में पता होता है कि कौन-सी परीक्षा देनी है, कौन-सा कोर्स पढ़ना है। असली जिंदगी में सब आउट ऑफ सिलेबस होता है।
जब भी बदलाव आता है, तो चुनौतियां और अवसर दोनों आते हैं।