मोदी सरकार का 'समुद्र मंथन': 84,084 करोड़ की लागत से निकलेगा भारत का ऊर्जा खजाना
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की नई 'समुद्र मंथन' पहल का ऐलान किया है। अभी तक समुद्र के ज्यादातर हिस्सों में तेल और गैस की खोज पर पाबंदी थी, लेकिन अब यह स्थिति बदलने वाली है। इस पहल का मकसद इन इलाकों को खोज के लिए खोलना है, जिससे नए ऊर्जा भंडार मिलें और कच्चे तेल के लिए भारत की विदेशों पर निर्भरता घटे।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 84,084 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी
पिछले महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद, 'समुद्र मंथन' परियोजना को वित्तीय वर्ष 2030-31 तक चलाया जाएगा, जिसके लिए 84,084 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसके मुख्य कामों में समुद्र तल के नीचे की चट्टानों का नक्शा बनाना, गहरे पानी में ड्रिलिंग करना और समुद्र में जरूरी ढांचागत सुविधाएं तैयार करना शामिल है। सरकार को उम्मीद है कि इससे भारत के ऊर्जा भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन से भी ज्यादा की बढ़ोतरी होगी, जिससे देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।