गूगल-अडानी के विशाखापट्टनम डेटा सेंटर को झटका, PIL ने पर्यावरण मंजूरी पर उठाया बड़ा सवाल
गूगल और अडानी मिलकर विशाखापट्टनम में एक बहुत बड़ा डेटा सेंटर बनाने की तैयारी में हैं, लेकिन उनकी इस योजना पर अब एक अड़चन आ गई है। एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि इस प्रोजेक्ट को जो पर्यावरणीय मंजूरी मिली है, वह बिना सही अनुमतियों या लोगों की राय लिए ही दे दी गई।
यह मामला, यानी पर्यावरण मंजूरी को चुनौती देने वाली यह जनहित याचिका, सामने आने के बाद पूर्व केंद्रीय सचिव ईएएस सरमा ने भी इस पर अपनी आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या इस खास साझेदारी के लिए सभी जरूरी जांच-पड़ताल को जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया गया।
अधिकारी कर रहे मंजूरी का बचाव
वहीं, अधिकारी इस मंजूरी को सही ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा पर्यावरण नियमों में डेटा सेंटर को अलग से किसी सूची में शामिल नहीं किया गया है, ऐसे में इसके लिए किसी अतिरिक्त अनुमति की जरूरत नहीं थी।
लेकिन आलोचकों का कहना है कि जिस जगह पर यह डेटा सेंटर बन रहा है, वह एक जलाशय और वन्यजीव अभयारण्य के बेहद नजदीक है। उनका तर्क है कि इस सेंटर में रोजाना भारी मात्रा में पानी (करीब 307 किलोलीटर) का इस्तेमाल होगा, जबकि यह ऐसा इलाका है जहां पहले से ही पानी की किल्लत है। इतना ही नहीं, इसके संचालन के लिए 512 मेगावाट बिजली की भी जरूरत पड़ेगी।