UN में भारत बोला- पाकिस्तान का आतंकवाद न उसे और न दुनिया को फायदा पहुंचाएगा
क्या है खबर?
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन की कड़ी आलोचना करते हुए इस्लामाबाद पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और छल-कपट का आरोप लगाया। भारत ने चेतावनी दी कि सीमा पार आतंकवाद के लिए उसका समर्थन गंभीर परिणाम भुगतने को मजबूर करेगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद को समर्थन देना बंद करना होगा।
बयान
गहलोत ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकारी जारी रहेगा
गहलोत ने कहा, "इस मुद्दे की जड़ में पाकिस्तान द्वारा लंबे समय से चली आ रही सीमा पार आतंकवाद की प्रथा है। हमने पिछले साल यह साबित किया था कि आतंकवादियों के पास भागने या छिपने की कोई जगह नहीं होगी। आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का हमारा अधिकार जारी रहेगा। हमें भरोसा है कि यह सभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को वैसा ही समझेगी जैसी वे असल में हैं, न कि जैसा उसके प्रतिनिधि झूठ बोलकर दिखाते हैं।"
आतंकवाद
भारत बोला- पाकिस्तान रात में आतंकी कामों को अंजाम देता है
गहलोत ने कहा, "आज पाकिस्तानी प्रतिनिधि की अजीब बातें सुनीं। यह घटना 9/11 आतंकवादी हमले की 25वीं बरसी मनाने के ठीक 2 हफ्ते बाद हुई। इसका मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तानी सेना की अकादमी के पास रह रहा था, जिसके प्रति आज पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने इतना सम्मान दिखाया। पाकिस्तानी लोग जिसे खुद 'फॉर्म 47 सरकार' कहते हैं, उससे यही उम्मीद की जा सकती है। पाकिस्तान दिन में सुरक्षा की बात करता है और रात में आतंकवाद को अंजाम देता है।"
जम्मू-कश्मीर
भारत ने जम्मू-कश्मीर का भी किया जिक्र
भारत ने जम्मू-कश्मीर का जिक्र भी किया।
गहलोत ने कहा, "यह मेरे देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा। लेकिन अगर हमें कश्मीर के बारे में बात करनी ही है, तो आइए पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर पर ध्यान दें। रावलकोट के लोगों से उन बेवजह हत्याओं, क्रूर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछिए, जिन्हें वे लंबे समय से झेल रहे हैं।"
बड़ी बातें
भारत के संबोधन की बड़ी बातें
हमने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों के बारे में पाखंडपूर्ण बातें उस सरकार से सुनीं, जिसकी राजधानी में अपने ही लोगों के खिलाफ सुरक्षा घेरा बनाया जा रहा है।
इस सभा में धार्मिक असहिष्णुता के बारे में बातें उस सरकार ने कीं, जिसका मुख्य आधार ही ईशनिंदा कानून हैं।
अगर पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद जारी रहा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
पाकिस्तान का आतंकवाद, छल और दोहरा मापदंड न तो उसके और न दुनिया के हित में है।