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पहलगाम हमले की जांच में बड़ा खुलासा, आतंकियों से मिले मोबाइल के तार पाकिस्तान से जुड़े
पहलगाम हमले के आतंकियों से बरामद 2 मोबाइल के संबंध पाकिस्तान से निकले हैं

पहलगाम हमले की जांच में बड़ा खुलासा, आतंकियों से मिले मोबाइल के तार पाकिस्तान से जुड़े

लेखन आबिद खान
Jun 01, 2026
01:50 pm

क्या है खबर?

पहलगाम आतंकी हमले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे इस हमले में पाकिस्तान की भूमिका और स्पष्ट होती जा रही है। अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के हाथ मोबाइल फोन से जुड़े ऐसे सबूत लगे हैं, जिन्होंने पाकिस्तान की पोल खोलकर रख दी है। पड़ताल में पता चला है कि आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए गए 2 मोबाइल फोन पाकिस्तान में आयात की गई खेप का हिस्सा थे।

रिपोर्ट

आतंकियों से बरामद 2 मोबाइल का पाकिस्तान से संबंध

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकवादियों से बरामद किए गए 2 मोबाइल फोन का संबंध पाकिस्तान से है। इन दोनों मोबाइल को 2021 और 2023 में खरीदा गया था, लेकिन यह कई साल तक बंद रहे और पहलगाम हमले के दौरान चालू किए गए। ये मोबाइल 28 जुलाई, 2025 को मुलनार महादेव इलाके में हुई मुठभेड़ में मारे गए फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी से बरामद किए गए थे।

मोबाइल

जनवरी, 2021 में पाकिस्तान पहुंचा था एक मोबाइल

रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकियों के पास से रेडमी 9T और रेडमी नोट 12 मोबाइल मिला था। NIA ने कंपनी से जानकारी मांगी तो पता चला कि रेडमी 9T पाकिस्तान की कंपनी टेक सिरात प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयात की गई खेप का हिस्सा था। यह मोबाइल 1 जनवरी, 2021 को पाकिस्तान पहुंचा था। यह मोबाइल 2021 में पाकिस्तान पहुंचने के बाद कभी चालू नहीं हुआ। अधिकारियों के अनुसार, फोन पहली बार पहलगाम हमले की तैयारी के दौरान चालू किया गया।

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दूसरा मोबाइल

दूसरे मोबाइल के बारे में क्या पता चला?

रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकियों के पास मिला दूसरा मोबाइल रेडमी नोट 12 पाकिस्तान की एयर लिंक कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा आयात किया गया था। इसका कार्यालय लाहौर के न्यू गार्डन टाउन इलाके में है। यह फोन भी लंबे समय तक बंद रहा और पहलगाम हमले से पहले चालू किया गया था। दोनों फोन से कुछ तस्वीरें और नक्शे बरामद किए गए हैं। इनमें पहलगाम के बैसरन मैदान और आसपास के इलाकों के नक्शे शामिल हैं।

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बैंक

कराची स्थित बैंक के पते पर भेजे गए पार्सल

रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल कंसाइनमेंट के लिए लिस्टेड लॉजिस्टिक्स कंपनी फैसल बैंक थी। कंसाइनमेंट भी बैंक के कराची स्थित आधिकारिक पते पर डिलीवर किया गया। अतीत में भी बैंक का नाम कुछ आतंकी गतिविधियों की फाइनेंसिंग संबंधी जांचों में सामने आ चुका है। 2007 में एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि लश्कर-ए-तैयबा और लजनत-अल-दावा के खाते फैसल बैंक में थे। अमेरिका में 9/11 की घटना के बाद हुई जांच में भी फैसल बैंक का नाम सामने आया था।

बयान

अधिकारी ने कहा- आतंकवादी को सौंपने के मकसद से ही फोन निकाला गया

रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया, "यह कंसाइनमेंट टेक सिरात को मिला होगा, लेकिन डॉक्यूमेंट्स में डिलीवरी बैंक को दिखाई गई है क्योंकि उसने इसे फाइनेंस किया था। यह फोन इसी कंसाइनमेंट से तस्करी किया लगता है और लश्कर तक पहुंचा। 2021 के बाद से ये फोन कभी चालू नहीं हुआ। ऐसा लगता है कि इसे कंसाइनमेंट से ठीक उसी मकसद से निकाला गया था ताकि इसे किसी आतंकवादी को सौंपा जा सके।"

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