AIMPLB के 'सेव शरीयत' अभियान पर सवाल, बुद्धिजीवी बोले- गलत सोच
90 से ज्यादा जाने-माने नागरिकों, जिनमें कई एक्टर और एक्टिविस्ट भी शामिल हैं, ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के नए 'सेव इंडिया, सेव शरीयत' अभियान पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि यह अभियान 'गलत सोच' पर आधारित है और इससे समाज में तनाव बढ़ सकता है।
इन नागरिकों ने इसके बजाय समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की मांग की है, जो लैंगिक समानता और मानवाधिकारों को सबसे ऊपर रखती है।
हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनों ने पर्सनल लॉ की समीक्षा की मांग की
नसीरुद्दीन शाह और तीस्ता सीतलवाड़ जैसे हस्ताक्षर करने वालों का तर्क है कि AIMPLB शरीयत कानून की जो व्याख्या करता है, वह पुराने पितृसत्तात्मक विचारों से प्रभावित है, न कि किसी दैवीय इच्छा से।
IMSD और BMMA जैसे संगठन चाहते हैं कि पर्सनल लॉ की समीक्षा न्याय और समानता के आधार पर हो। उनका कहना है कि अब ऐसे बदलावों की जरूरत है जो आज के समाज में वास्तविक निष्पक्षता को दर्शा सकें।