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कौन हैं ऑपरेशन सिंदूर में शहीद होने वाले 6 जवान? पहली बार सार्वजनिक हुए नाम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राइफलमैन की माता सुदेश कुमारी और पिता यश पॉल ने वीर चक्र ग्रहण किया

कौन हैं ऑपरेशन सिंदूर में शहीद होने वाले 6 जवान? पहली बार सार्वजनिक हुए नाम

लेखन गजेंद्र
Jun 26, 2026
12:19 pm

क्या है खबर?

भारत सरकार ने पहली बार उन शहीदों के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' में अपनी जान गंवाई थी। शहीदों के विवरण अब सेना युद्ध स्मारक की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इन वीर जवानों में से 2 को वीर चक्र और वायु पदक से सम्मानित किया गया है। इन 6 सैनिकों के नाम नई दिल्ली में इंडिया गेट के पास स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में विशेष ग्रेनाइट पट्टिकाओं पर स्थायी रूप से अंकित होगा।

शहीद

कौन हैं शहीद होने वाले जवान?

शहीद जवानों में 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड मुख्यालय के सब मेजर पवन कुमार, जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की चौथी बटालियन के राइफलमैन सुनील कुमार, 5वीं फील्ड रेजिमेंट के लांस नायक दिनेश कुमार, 851 लाइट रेजिमेंट से अग्निवीर मूड मुरली नायक, 237 फील्ड वर्कशॉप के हवलदार सुनील कुमार सिंह और वायुसेना की 39वीं विंग के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं। राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरान्त देश के तीसरे सर्वोच्च युद्ध सम्मान 'वीर चक्र' और सार्जेंट सुरिंदर कुमार को वायु पदक मिला है।

सम्मान

जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए अधिकांश शहीद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 6 में से अधिकांश जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए हैं। सुनील कुमार पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात थे। बता दें कि सभी शहीदों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में दिखाई देंगे। यहां ग्रेनाइट की ईंटों से निर्मित 16 संकेंद्रित वृत्ताकार दीवारें हैं। प्रत्येक ईंट पर स्वतंत्रता के बाद से सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद का नाम, पद और रेजिमेंट अंकित हैं।

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युद्ध

पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था 'ऑपरेशन सिंदूर'

पाकिस्तान आतंकियों ने 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में गोलीबारी करके 26 पुरुष पर्यटकों को उनके परिवारों के सामने मार डाला था। इसके बाद भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया और पाकिस्तान के 6 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान करीब 100 प्रमुख आतंकी मारे गए। पाकिस्तान ने भी भारत को निशाना बनाया, लेकिन हमले असफल रहे। इसके बाद 10 मई को पाकिस्तान ने युद्धविराम की पहल की, जिस पर भारत सहमत हुआ।

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