नोएडा: CRPF कॉन्स्टेबल ने 10 वर्षीय बच्ची को नौकरानी बनाया, भूखा रखा-प्रताड़ित किया; वेंटीलेटर पर भर्ती
क्या है खबर?
दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के कांस्टेबल ने 10 वर्षीय बच्ची को घर पर काम पर रखा और उसे प्रताड़ित किया। कांस्टेबल तारिक अनवर और उनकी पत्नी रिम्पा खातून पर बच्ची को भूखा रखने और शारीरिक यातनाएं देने का आरोप है। बच्ची गंभीर हालत में अस्पताल में वेंटीलेटर पर भर्ती है। दंपति हिरासत में है और कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है।
प्रताड़ना
CRPF शिविर में रखा था बच्ची को घरेलू नौकर
CRPF के एक अधिकारी ने बताया कि बच्ची रिम्पा की रिश्तेदार है। विभाग को बिना बताए और उचित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना, दंपति ने उसे ग्रेटर नोएडा स्थित CRPF शिविर में रखा था। दंपति बच्ची से घरेलू काम कराते और खाना नहीं देते थे। वे शारीरिक यातनाएं देते थे। जब बच्ची हालत बिगड़ गई तो उसे 15 जनवरी को सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों ने बच्ची के शरीर पर गंभीर चोट देखकर पुलिस को सूचना दी।
जांच
बच्ची को जबरन डिस्चार्ज कराकर मैक्स में भर्ती कराया
सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्ची का मेडिकल लीग केस तैयार किया, जिसकी भनक कांस्टेबल को लगते ही उसने गंभीर हालत में बच्ची को डिस्चार्ज करा लिया और आर्थिक कारणों का हवाला दिया। उसने बच्ची को नोएडा के सेक्टर-128 स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां वह अभी वेंटिलेटर पर भर्ती है। मामला सामने आने पर दंपति के खिलाफ 18 जनवरी को इकोटेक तृतीय थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 110 के तहत FIR दर्ज हुई है।
प्रताड़ना
बच्ची का हीमोग्लोबिन सिर्फ 1.9
बच्ची को किस कदर प्रताड़ित किया गया है, वह उसकी मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता है। उसके गर्दन, सिर, हाथों और पैरों पर, चेहरे, गर्दन और शरीर पर कई चोट के निशान, आंखे के नीचे काले धब्बे, पूरे शरीर में सूजन और पैरों में सूजन थी। जब उसे आपातकालीन कक्ष में लाया गया तो वह बेहोश और सुस्त थी। बच्ची का हीमोग्लोबिन घटकर 1.9 हो गया, जबकि यह 12-15 ग्राम होना चाहिए। इससे भयावह क्रूरता का पता चलता है।
जांच
पुलिस की लापरवाही सामने आई
मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। अस्पताल ने 15 जनवरी को पुलिस को औपचारिक सूचना दी थी, लेकिन मामला 3 दिन बाद दर्ज किया गया। यह शिकायत CRPF के अधिकारी द्वारा दर्ज की गई थी। आरोप है कि कांस्टेबल लड़की को प्रारंभिक उपचार के लिए शिविर अस्पताल नहीं ले गया और इधर-उधर अस्पताल में घुमाते रहा। जिस संदिग्ध स्थान पर बच्ची शोषण हुआ, उसे सील किए बिना खाली कराया गया और कम गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।