डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए भारत को भेजा निमंत्रण
क्या है खबर?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा में युद्ध के बाद के शासन और पुनर्निर्माण की देखरेख के लिए गठित प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। यह निमंत्रण ट्रंप की गाजा युद्धविराम की व्यापक पहल और संघर्षग्रस्त क्षेत्र को स्थिर करने और दीर्घकालिक शासन की ओर इसके संक्रमण का प्रबंधन करने के उद्देश्य से बनाई गई 20 सूत्री व्यापक योजना का हिस्सा है। आइए पूरी खबर पर नजर डालते हैं।
निमंत्रण
भारत समेत 4 देशों को भेजा गया है निमंत्रण
PTI के अनुसार, भारत के अलावा, 4 अन्य देशों ने रविवार को कहा कि अमेरिका ने उन्हें गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। इनमें जॉर्डन, ग्रीस, साइप्रस और पाकिस्तान शामिल हैं। इससे पहले कनाडा, तुर्की, मिस्र, पराग्वे, अर्जेंटीना और अल्बानिया ने निमंत्रण की पुष्टि की थी। उम्मीद है कि अमेरिका आने वाले दिनों में दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान बोर्ड में शामिल सदस्यों की अंतिम सूची की घोषणा करेगा।
कार्य
गाजा शांति बोर्ड क्या करेगा?
प्रस्तावित शांति बोर्ड का उद्देश्य गाजा में हो रहे घटनाक्रमों की निगरानी करना है, क्योंकि 10 अक्टूबर को लागू युद्धविराम दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है। इसके जनादेश में गाजा में नई फिलिस्तीनी समिति की स्थापना की निगरानी, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, हमास का निरस्त्रीकरण और युद्ध से तबाह क्षेत्र का पुनर्निर्माण शामिल है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने अमेरिका समर्थित 20 सूत्री गाजा युद्धविराम योजना का समर्थन किया है, जिसमें बोर्ड का गठन भी शामिल है।
समिति
गाजा शांति बोर्ड कार्यकारी समिति में कौन-कौन शामिल?
कार्यकारी समिति में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल और इजरायली अरबपति याकिर गाबे शामिल हैं। कतर, मिस्र और तुर्की के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हैं, जो युद्धविराम की निगरानी कर रहे हैं। हमास के साथ तुर्की के संबंधों को देखते हुए इसमें तुर्की की भागीदारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
भूमिका
भारत की भूमिका और क्षेत्रीय स्थिति
भारत का इस सूची में शामिल होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ उसके लंबे समय से संबंध हैं। इजरायल के साथ भारत रणनीतिक साझेदारी बनाए हुए है और साथ ही फिलिस्तीन को लगातार मानवीय सहायता भी प्रदान कर रहा है। संघर्ष शुरू होने के बाद गाजा को मिस्र के रास्ते सहायता भेजने वाले पहले देशों में भारत भी शामिल था। हालांकि, इजरायल इसमें पाकिस्तान की भूमिका स्वीकार नहीं करना चाहता।