
उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव में OBC को नहीं मिलेगा आरक्षण, हाई कोर्ट का अहम फैसला
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को कोई आरक्षण नहीं मिलेगा और इसके बिना ही चुनाव कराए जाएंगे।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आज मामले पर अहम फैसला सुनाते हुए OBC आरक्षण देने वाले उत्तर प्रदेश सरकार के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया।
जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस सौरव लवानिया ने यह फैसला सुनाया।
राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।
पृष्ठभूमि
क्या है पूरा मामला?
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने 5 दिसंबर को नगर निकाय चुनाव में OBC आरक्षण का एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया था।
इसमें 17 नगर निगमों में से चार- अलीगढ़, मथुरा-वृंदावन, मेरठ और प्रयागराज- में मेयर के पद को OBC के लिए आरक्षित किया गया था।
इसी तरह 200 नगर परिषदों में से 54 और 545 नगर पंचायत में से 147 में चेयरपर्सन के पद को OBC उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किया गया था।
विरोध
सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन न करने के कारण हुआ आरक्षण का विरोध
नगर निकाय चुनाव में OBC को आरक्षण देने के उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
इन याचिकाओं में कहा गया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले का इस्तेमाल किए बिना आरक्षण दिया है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन करना चाहिए और मुद्दे पर फैसले के लिए एक आयोग गठित करना चाहिए।
ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूला
क्या होता है आरक्षण का ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूला?
सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूला के अनुसार, पिछड़े वर्ग को आरक्षण देना है या नहीं, इसका फैसला तीन मानकों पर किया जाता है।
इसके तहत देखा जाता है कि पिछड़ा वर्ग की आर्थिक-शैक्षणिक स्थिति कैसी है, उसे आरक्षण देने की जरूरत है या नहीं और उसको आरक्षण दिया जा सकता है या नहीं।
सरकार को आरक्षण देते वक्त 50 प्रतिशत की उच्चतम सीमा का ध्यान रखना होता है। इन मुद्दों पर फैसले के लिए आयोग गठित किया जाता है।
दूसरा पक्ष
राज्य सरकार ने दी थी रैपिड सर्वे के आधार पर आरक्षण देने की दलील
याचिकाकर्ताओं की दलीलों का जवाब देते हुए सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा था कि उसने एक रैपिड सर्वे किया था, जो ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूला जितना सटीक है।
हालांकि हाई कोर्ट ने उसकी इस दलील को स्वीकार नहीं किया और OBC आरक्षण देने के उसके फैसले को रद्द कर दिया।
लखनऊ बेंच ने शनिवार को मामले की सुनवाई पूरी की थी। उसने लंच के दौरान मामले पर सुनवाई की थी क्योंकि यह मामला लोकतंत्र के नजरिए से अहम था।
बयान
OBC को आरक्षण देने पर अड़े योगी, कहा- सर्वे कराएंगे
हाई कोर्ट के फैसले के बावजूद मुख्यमंत्री योगी OBC को आरक्षण देने पर अड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एक आयोग का गठन करेगी जो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार OBC का सर्वे करेगी।
उन्होंने कहा कि OBC आरक्षण दिए बिना चुनाव नहीं कराए जाएंगे और जरूरत पड़ी तो सरकार हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
समाजवादी पार्टी ने कहा कि यह भाजपा सरकार की पिछड़े वर्गों को आरक्षण से वंचित करने की साजिश है।