निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर जान दी
क्या है खबर?
दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में पूरे देश को चौंका देने वाले निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। कोली पिछले कुछ दिन से उत्तराखंड के हरिद्वार में चाय बेच रहा था। उसी दुकान में उसका शव रस्सी के सहारे लटका मिला। कोली का परिवार अल्मोड़ा में रहता है। पुलिस ने उसके परिजनों को घटना की जानकारी दे दी है। शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।
आत्महत्या
कोई सुसाइड नोट नहीं मिला
पुलिस ने बताया कि सप्त ऋषि पुलिस चौकी को सूचना मिली थी की लालमाता मंदिर के सामने चाय की दुकान में किसी ने फांसी लगा ली है।
पुलिस जब मौके पर पहुंची तो मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में हुई, जो मंगरुखाल, भिकियासेड़ का निवासी है।
शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने बताया कि कोली कुछ महीनों से हरिद्वार में किराए पर चाय का खोखा चला रहा था।
दुकान से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
आरोपी
पिछले साल अंतिम लंबित मामले में हुआ था बरी
सुप्रीम कोर्ट ने कोली को पिछले साल नवंबर में निठारी कांड के अंतिम लंबित मामले में भी बरी कर दिया था।
तत्कालीन भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई, सूर्यकांत और विक्रम नाथ की खंडपीठ ने कोली की दोषसिद्धि के विरुद्ध दायर सुधारात्मक याचिका स्वीकार की थी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 12 मामलों में बरी किए जाने के बाद उसने 2025 में सुप्रीम कोर्ट में सुधारात्मक याचिका दायर की थी।
तब कोर्ट ने दोषसिद्धी को रद्द कर दिया था।
कांड
क्या है निठारी कांड?
दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी गांव में एक घर के पास नाले में कई कंकाल मिले, जिसका मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर था और कोली उसका घरेलू नौकर था।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कोली को हत्या, अपहरण, बलात्कार और सबूत नष्ट करने, जबकि पंढेर पर अनैतिक तस्करी का आरोप लगाया गया।
कोली को हत्या-बलात्कार समेत 10 से अधिक मामलों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई थी।
बरी
एक-एक कर हर आरोप से बरी हुआ था कोली
कोली को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2009 में दोषी ठहराया था, लेकिन 15 वर्षीय लड़की की हत्या-बलात्कार मामले में सबूतों के अभाव में पंढेर बरी हो गया।
हाई कोर्ट के खिलाफ कोली ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन 2011 और 2014 में यह खारिज हो गई।
जनवरी, 2015 को हाई कोर्ट ने कोली की दया याचिका पर देर से निर्णय के कारण उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
हालांकि, इसके बाद वह अन्य मामलों में बरी हुआ।