स्टारलिंक विवाद: मस्क के रिलायंस दबाव दावे पर सांसद ने क्यों किया पलटवार?
हाल ही में टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने दावा किया था कि भारत ने उनकी स्टारलिंक इंटरनेट सेवा को मंजूरी नहीं दी है और इसका कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज का दबाव है। हालांकि, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस बात को गलत बताया है। दुबे ने कहा कि एक संसदीय समिति ने पहले ही स्टारलिंक से जुड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हर आशंका की जांच की थी। जांच में उन्हें कोई जोखिम नहीं मिला, ऐसे में देश में फैसले सिर्फ बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं लिए जा रहे हैं।
स्पेक्ट्रम आवंटन पर जियो और स्टारलिंक में खींचतान
भले ही स्टारलिंक को साल 2025 में कई अहम लाइसेंस मिल गए थे, लेकिन अब भी वह कई कानूनी पेचीदगियों में उलझा है। इसका सबसे बड़ा मुद्दा स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर है। जियो चाहता है कि स्पेक्ट्रम की नीलामी हो, जबकि स्टारलिंक और दूसरे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इसे प्रशासनिक आवंटन के जरिए चाहते हैं। भारत भी सुरक्षा कारणों से स्थानीय डाटा गेटवे और निगरानी उपकरण लगाने पर जोर देता है। इसके अलावा, शील मोहोनोत नाम के विशेषज्ञ ने चिंता जताई है कि स्टारलिंक की कीमतें भारत के हिसाब से काफी ज्यादा हो सकती हैं। उनका कहना है कि रवांडा, जहां स्टारलिंक की सेवा सबसे सस्ती है, वहां भी इसकी कीमत 27 डॉलर प्रति माह है। भारत में इंटरनेट काफी सस्ता है, ऐसे में यह कीमत लोगों के लिए महंगी साबित हो सकती है।