ज़हर बन रहा पीने का पानी? NGT का बड़ा खुलासा: 2 लाख मौतें, 21 करोड़ बीमारियां
भारत के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने जल प्रदूषण से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की है। ट्रिब्यूनल ने यह मांग इसलिए उठाई है क्योंकि साल 2005 से 2022 के बीच, पानी से होने वाली बीमारियों के 20.98 करोड़ से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए, जिनमें से अधिकतर दस्त (डायरिया) के थे।
NGT ने चेतावनी दी है कि गंदा पानी सिर्फ हमारी सेहत के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि यह हर साल करीब दो लाख लोगों की मौत का कारण बन सकता है। इसके साथ ही, यह देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
ट्रिब्यूनल ने 24/7 वॉटर रिपोर्टिंग ऐप की मांग की
ट्रिब्यूनल ने सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे पानी की समस्याओं की शिकायत दर्ज कराने के लिए 24/7 (चौबीसों घंटे) काम करने वाला एक ऐप लॉन्च करें। साथ ही, पाइपलाइनों की निगरानी के लिए GIS मैपिंग जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाए।
ट्रिब्यूनल की खास चिंता यह है कि पीने के पानी के पाइप अक्सर सीवर लाइनों के बहुत करीब से गुजरते हैं, जिससे पानी के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। ट्रिब्यूनल का यह कदम मध्य प्रदेश में पानी की गंभीर समस्याओं के सामने आने के बाद आया है, जहाँ भूजल के गंदे होने और पीने के पानी के प्रदूषित होने से लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। स्पष्ट है कि स्वच्छ पीने का पानी और बेहतर बुनियादी ढांचा अब और इंतजार नहीं कर सकता।