पोखरा में नेपाली युवाओं और गोरखा पूर्व सैनिकों ने की अग्निपथ योजना के तहत भर्ती की मांग
नेपाली युवा, पूर्व गोरखा सैनिक और उनके परिवार पोखरा में भारत की अग्निपथ योजना के तहत भर्ती की मांग के लिए एकजुट हुए। साल 2019 से भारतीय सेना में गोरखाओं की भर्ती थमी हुई है, जिसकी वजह पहले कोरोना वायरस महामारी थी और बाद में नेपाल ने भारत की नई अग्निपथ योजना पर चिंताएं जताईं। दरअसल, अग्निपथ योजना में 4 साल की सेवा के बाद केवल 25 प्रतिशत जवानों को ही स्थायी सेवा में रखा जाता है। नेपाल का मानना है कि यह व्यवस्था 1947 में हुए ऐतिहासिक समझौते के खिलाफ है।
प्रदर्शनकारियों ने की पूर्व सैनिकों के आधिकारिक पंजीकरण की मांग
इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल की अगुवाई में यह विरोध प्रदर्शन पोखरा स्टेडियम से शुरू हुआ और कस्की जिला प्रशासन कार्यालय पर जाकर खत्म हुआ। कई प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था कि अग्निवीर के तौर पर भारतीय सेना में शामिल होना खाड़ी देशों में नौकरी करने से कहीं बेहतर है। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल था कि रोजगार के ज्यादा मौके देने के लिए भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जाए और गोरखाओं की सैन्य परंपराओं को बरकरार रखा जाए। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व सैनिकों के संगठनों का आधिकारिक पंजीकरण कराने की भी मांग उठाई, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके। यह विरोध प्रदर्शन भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा से ठीक पहले किया गया।