ड्रग तस्करी मामले में NCB की सफलता, UAE से भारत लाया गया अंतरराष्ट्रीय सरगना वीरेंद्र सिंह
क्या है खबर?
भारत की मादक पदार्थ विरोधी मुहिम में बड़ी सफलता मिली है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग सरगना वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरेंद्र बैसोया का संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से सफलतापूर्वक भारत प्रत्यर्पण करा लिया है। दुबई में उसकी गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार की विशेष पहल पर उसे एयर इंडिया के विमान AI 4310 से वापस भारत लाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (14 अगस्त) को इसकी आधिकारिक घोषणा की।
उपलब्धि
शाह ने कार्रवाई को बताया मील का पत्थर
गृह मंत्री शाह ने इस कार्रवाई को केंद्र सरकार की नशीले पदार्थों के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता नीति में मील का पत्थर बताया है।
उन्होंने एक्स पर लिखा, 'मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और उनके पूरे नेटवर्क को खत्म कर रही है। NCB ने नशीले पदार्थों के खिलाफ 'शून्य-सहिष्णुता' नीति में नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए ड्रग तस्करी के सरगना वीरेंद्र बसोया को UAE से वापस लाने में सफलता हासिल की है।'
तारीफ
शाह ने की NCB की तारीफ
शाह ने लिखा, 'हमारी एजेंसियों ने इस अपराधी को पकड़ने के लिए 'टॉप-टू-बॉटम और बॉटम-टू-टॉप' (ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर) का समग्र जांच दृष्टिकोण अपनाया है। इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि ड्रग तस्कर चाहे दुनिया के किसी भी कोने में छिप जाएं, वे भारतीय कानून के लंबे हाथों से कभी नहीं बच सकते।'
बसोया की भारत वापसी से अब इस गिरोह के वित्तीय ढांचे और भारत में फैले स्थानीय नेटवर्क के खुलासे की उम्मीद है।
मास्टरमाइंड
मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का मास्टरमाइंड है बसोया
बसोया मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का मास्टरमाइंड है। इसी तरह वह पुणे के बहुचर्चित 6,000 करोड़ रुपये के ड्रग मामले में मुख्य आरोपियों में से एक है।
भारतीय सुरक्षा और जांच एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थीं। उसकी वैश्विक आवाजाही को रोकने के लिए NCB ने पहले ही उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवा दिया था।
बसोया इस पूरे गिरोह के मुख्य आरोपी संदीप धूनिया का बेहद करीबी सहयोगी है।
प्रकरण
क्या है पुणे का 6,000 करोड़ रुपये का ड्रग तस्करी मामला?
यह मामला फरवरी 2024 में तब सामने आया जब पुणे पुलिस और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीमों ने पुणे, दिल्ली और NCR से लगभग 1,700 किलोग्राम से अधिक 'मेफेड्रोन' जब्त की थी।
अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में इसकी कुल कीमत लगभग 5,500 से 6,000 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
पुणे के पास कुरकुंभ औद्योगिक क्षेत्र (MIDC) की एक वैध केमिकल निर्माण फैक्ट्री में रसायनों की आड़ में बड़े पैमाने पर इस नशीले पदार्थ का उत्पादन किया जा रहा था।
वितरण
विदेशों तक भेजी जा रही थी 'मेफेड्रोन'
पुणे में तैयार 'मेफेड्रोन' को कूरियर और बड़े पार्सल से दिल्ली, मुंबई, पश्चिम बंगाल और वहां से लंदन और खाड़ी देशों में भेजा जा रहा था।
इस नेटवर्क का मुख्य रणनीतिकार संदीप धूनिया नाम का व्यक्ति है। वह पुणे पुलिस की शुरुआती कार्रवाई के दौरान ही दुबई भाग गया था।
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, बाद में वह दुबई से पाकिस्तान पहुंच गया, जिससे इस गिरोह में पाकिस्तानी सिंडिकेट और दाऊद इब्राहिम गिरोह के शामिल होने का संदेह गहरा गया है।
भूमिका
मामले में क्या थी बसोया की भूमिका?
बसोया दुबई में बैठकर इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय वितरण, वित्तीय लेनदेन और हवाला नेटवर्क को संभाल रहा था। वह धूनिया का सबसे करीबी सहयोगी है।
इस मामले की जांच में पुलिस ने न केवल ड्रग तस्करों बल्कि फैक्ट्री मालिकों, कूरियर ऑपरेटरों और कुछ स्थानीय रसूखदार लोगों को भी गिरफ्तार किया था।
इस गिरोह का वित्तीय ढांचा पूरी तरह से 'हवाला' नेटवर्क पर टिका था। उसके जरिए ही भारत में नेटवर्क के संचालन के लिए पैसा आता था।
योजना
बसोया का प्रत्यर्पण 3 वर्षीय राष्ट्रीय कार्य योजना का हिस्सा
बसोया का प्रत्यर्पण भारत सरकार की उस व्यापक रणनीति के तहत हुआ है, जिसे इस व्यापार को जड़ से खत्म करने के लिए तैयार किया गया है।
इसी साल जून में सरकार ने 'ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029' लॉन्च किया था।
इसके तहत 40 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों और प्रवर्तन एजेंसियों को एक साथ जोड़कर खुफिया जानकारी और पुनर्वास पर काम किया जा रहा है ताकि इस काले कारोबार की कमर तोड़ी जा सके।