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NCERT का विवादों से रहा है नाता, जानिए किताबों में बदलावों पर कब-कब हुआ हंगामा?
NCERT द्वारा किताबों में बदलावों करने पर पहले भी हो चुके हैं विवाद

NCERT का विवादों से रहा है नाता, जानिए किताबों में बदलावों पर कब-कब हुआ हंगामा?

Feb 27, 2026
06:30 pm

क्या है खबर?

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) इन दिनों कक्षा 8वीं की नई संशोधित सामाजिक विज्ञान की किताब को लेकर विवादों में घिरी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब के उस अध्याय के लिए NCERT को फटकार लगाई है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलो का जिक्र किया गया था। कोर्ट ने किताब के प्रकाशन, मुद्रण या डिजिटल वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में आइए NCERT के पुराने विवादों पर नजर डालते हैं।

फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई NCERT को फटकार

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने पाठ्यपुस्तक पर प्रतिबंध लगाने का आदेश देते हुए पुस्तक की सामग्री को अत्यंत अपमानजनक और लापरवाह भरा बताया है। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि यह पुस्तक न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है। NCERT ने माफी मांगते हुए उस अध्याय को हटाने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए जवाबदेही तय करने का आह्वान किया है।

जानकारी

NCERT ने उठाया यह कदम

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद NCERT ने इन किताबों में से बिक चुकी 38 कॉपियों को वापस लेने का आदेश दिया है, जिनमें से 16 किताबें पहले ही वापस मिल चुकी हैं। अन्य कॉपियों को भी जल्द ही मंगवाने के प्रयास जारी हैं।

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विवाद

क्या था विवादित अध्याय और क्यों हुआ विवाद?

दरअसल, कक्षा 8वीं की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका' अध्याय के कुछ ऐसे हिस्से थे, जिनमें भारत की न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों को बताया गया था। इनमें न्यायपालिका में विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार और वकीलों के अनुसार बढ़ती लंबित मामलों की संख्या का जिक्र किया गया था। सुप्रीम कोर्ट और कुछ वरिष्ठ वकीलों ने इसे अनुपयुक्त बताते हुए आलोचना की थी। उसके बाद विवाद खड़ा हो गया।

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#1

मुगल और दिल्ली सल्तनत की सामग्री हटाने का विवाद

NCERT ने साल 2023-24 में कक्षा 7वीं और 12वीं की इतिहास की किताबों से मुगल साम्राज्य और दिल्ली सल्तनत से जुड़े कई हिस्से हटा दिए थे। कक्षा-12 पहले छात्रों के पास इतिहास, भूगोल और सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन के लिए तीन अलग-अलग किताबें होती थीं, लेकिन उस दौरान इन तीनों को मिलाकर एक ही किताब बना दी। इसी तरह कक्षा-7 की इतिहास की किताब से मध्यकालीन दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य के उदय के भाग हटा दिए थे।

विवाद

आलोचको ने बताया था 'इतिहास बदलने का प्रयास'

NCERT के इस कदम पर आलोचकों आलोचकों का कहना था कि यह भारत के इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर को कम करके दिखाने का प्रयास है। कुछ इतिहासकारों ने इसे 'इतिहास को बदलने' की कोशिश बताया था। NCERT ने इसे कोरोना महामारी के बाद छात्रों पर से सिलेबस कम करने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया था। हालांकि, विवाद बढ़ने पर दिल्ली सल्तनत, मुगल साम्राज्य और औपनिवेशिक मुठभेड़ों के विषयों को कक्षा 7 से कक्षा 8 में स्थानांतरित कर दिया।

#2

मराठा बनाम राजपूत सामग्री पर भी हुआ विवाद

एक और विवाद तब हुआ जब नई किताबों में मराठा इतिहास को ज्यादा पेज दिए गए, जबकि राजपूत शासकों को कम जगह मिली। कुछ संगठनों और नेताओं ने इसे असंतुलित प्रस्तुति बताया। उनका कहना था कि अलग-अलग ऐतिहासिक शासकों को बराबर महत्व मिलना चाहिए। इस पर NCERT ने जवाब दिया कि किताबें नए पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार की गई हैं और विषय सामग्री का चयन विशेषज्ञ समितियों द्वारा किया जाता है। इस पर काफी विवाद रहा था।

#3

टीपू सुल्तान को लेकर विवाद

NCERT द्वारा कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब से टीपू सुल्तान को हटाने और मुगल शासक अकबर को 'सहिष्णुता और क्रूरता के मिश्रण' के रूप में चित्रित करने का निर्णय भी विवाद का कारण बना था। कुछ ने कहा कि टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती योद्धा के रूप में दिखाया जाता रहा है, इसलिए उनके योगदान को कम नहीं आंका जाना चाहिए। कुछ समूहों ने इसे इतिहास को नए सिरे से पेश करने का आरोप लगाया था।

#4

महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े संदर्भ में बदलाव

NCERT ने कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की किताब से महात्मा गांधी के हिंदू उग्रवाद के विरोध और उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे की वैचारिक पृष्ठभूमि को हटा दिया था। इस पर विपक्षी दलों और कुछ शिक्षाविदों ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे ऐतिहासिक तथ्यों की प्रस्तुति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इस पर NCERT ने स्पष्ट किया कि बदलाव तथ्यों को हटाने के लिए नहीं, बल्कि भाषा को सरल और संक्षिप्त करने के लिए किए गए हैं।

#5

कोरोना महामारी के दौरान पाठ्यक्रम कम करने पर विवाद

कोराना वायरस महामारी के दौरान NCERT ने लोकतंत्र, नागरिक अधिकार आंदोलन, कृषि आंदोलन और पर्यावरण पर आधारित अध्यायों को छोटा कर दिया था और कुछ सामग्री हटा दी थी। कुछ लोगों ने इसे जरूरी कदम बताया, जबकि अन्य ने आरोप लगाया कि संवेदनशील मुद्दों को जानबूझकर हटाया गया है। हालांकि, NCERT ने कहा कि यह अस्थायी कदम था और उद्देश्य सिर्फ छात्रों का शैक्षणिक बोझ कम करना था। इस पर काफी बहस हुई थी।

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