NCERT विवाद के बीच जजों पर कार्रवाई की चर्चा, 10 साल में 8,600 से अधिक शिकायतें
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 8 की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' को लेकर तीखी बहस हुई है। कोर्ट ने NCERT को न केवल विवादित अध्याय वाली किताब हटाने का आदेश दिया, बल्कि उन लेखकों का नाम भी मांगा है, जिसने विवादित अध्याय लिखा है। इस पूरे विवाद के बीच लोकसभा में पेश आंकड़ों ने नई बहस छेड़ दी है, जिसमें जजों के खिलाफ लंबित 8,600 शिकायतों की जानकारी दी गई।
शिकायत
10 साल में जजों के खिलाफ 8,600 शिकायतें
लोकसभा में 13 फरवरी बताया गया कि 2016 से अब तक भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) कार्यालय को मौजूदा जजों के खिलाफ 8,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लिखित जवाब में बताया कि 2016-2025 के बीच मौजूदा जजों के खिलाफ 8,639 शिकायतें मिली, जिसमें सबसे अधिक शिकायतें 2024 में मिली हैं। इसमें दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का मामला भी शामिल है, जिनके घर से बेहिसाब नकदी मिली थी।
शिकायत
कब कितनी मिली शिकायतें?
लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों से पता चला कि सबसे अधिक शिकायतें 2024 में दर्ज की गईं, जिनकी संख्या 1,170 थी। इसके बाद 2025 में 1,102 मामले दर्ज हुए। अन्य वर्षों में 2019 में 1,037 और 2022 में 1,012 शिकायतें मिली हैं। सबसे कम शिकायतें 2020 में 518 दर्ज की गईं हैं। वर्ष 2016 में 729, 2017 में 682 और 2018 में 717 शिकायतें मिली थीं। वर्ष 2021 में 686 और 2023 में 977 शिकायतें मिली हैं।
कार्रवाई
जजों के खिलाफ शिकायतों पर कैसे होती है कार्रवाई?
CJI सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त न्यायाधीशों और किसी भी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के विरुद्ध शिकायतें प्राप्त करने के लिए अधिकृत हैं। हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के विरुद्ध शिकायतों का निपटारा संबंधित न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश करते हैं। जिला और अधीनस्थ न्यायालयों पर अनुशासनात्मक नियंत्रण संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत संबंधित हाई कोर्ट के पास होता है। शिकायतों का निपटारा कोर्ट "आंतरिक तंत्र" से करता है। गंभीर मामले में समिति इस्तीफा देने की सिफारिश कर सकती है।