जमुई एनकाउंटर सच या फर्जीवाड़ा? आरोपी की मां के दावे के बाद पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
बिहार के जमुई से सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में एक नाबालिग लड़की और उसके साथी लड़के को कुछ युवकों द्वारा परेशान करने का आरोप था। यह वीडियो वायरल होते ही पुलिस तुरंत हरकत में आ गई।
दरअसल, पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ में मामले के मुख्य आरोपी नंदन यादव के पैर में गोली लग गई। हालांकि, नंदन की मां का दावा है कि यह मुठभेड़ फर्जी थी और वह लगातार अपने बेटे को बेगुनाह बताकर न्याय की गुहार लगा रही हैं। इस पूरी घटना के बाद से पुलिस के कामकाज पर सवाल उठने लगे हैं और इस मुद्दे पर लोगों की राय बंटी हुई है।
लड़की की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर मुख्यमंत्री का आश्वासन
मुख्यमंत्री ने पीड़ित लड़की के परिवार को उसकी पूरी सुरक्षा और पढ़ाई जारी रखने का भरोसा दिया है। इस मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग भी लगातार नजर रख रहा है। यह घटना इस बात पर भी सोचने को मजबूर करती है कि नाबालिगों की सुरक्षा के लिए POCSO एक्ट कितना महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह मामला कुछ अहम सवाल भी खड़े करता है, खासकर जब हालात बिगड़ जाते हैं, तो किसकी जवाबदेही तय होती है।