मुंबई में मराठी भाष बनी ऑटो-टैक्सी चालकों की अग्निपरीक्षा, विरोध के बाद सरकार ने बढ़ाई राहत
महाराष्ट्र सरकार के एक नए नियम के बाद अब मुंबई के ऑटो और टैक्सी चालकों को सामान्य मराठी भाषा सीखनी पड़ रही है। इस नियम के तहत उन्हें इस भाषा का सामान्य ज्ञान होना अनिवार्य है। इन दिनों आप इन चालकों की जुबान पर 'होय, बसा' (हां, बैठिए) और 'कुठेय जायचंय?' (कहां जाना है?) जैसे वाक्य आसानी से सुन सकते हैं। कुछ चालक तो सवारी टालने के लिए 'मला गैस भरायचंय' (मुझे CNG भरवानी है) या 'मला घरी जायचंय' (मुझे घर जाना है) जैसे बहाने भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
मुंबई चालक यूनियन मांग रही और समय
चालक यूनियनों ने सरकार से और समय और मदद मांगी है। उनका कहना है कि कई चालक अभी भाषा के टेस्ट पास नहीं कर पा रहे हैं। फिलहाल, जो चालक सड़क पर होने वाले मराठी टेस्ट में फेल हो जाते हैं, उन्हें भाषा सीखने के लिए एक महीने का नोटिस दिया जाता है। 24 अगस्त को जब गैर-मराठी बोलने वाले चालकों ने विरोध प्रदर्शन किया, तो शहर में यातायात रुक गया और किराए भी बढ़ गए। इस हंगामे के बाद अधिकारियों ने 161 मराठी भाषा प्रशिक्षण केंद्र और एक खास RTO हेल्पलाइन शुरू करने का ऐलान किया। सरकार का कहना है कि अगर कोई चालक टेस्ट में फेल भी होता है, तो उसका लाइसेंस तुरंत रद्द नहीं किया जाएगा। वे अंतिम तारीख बढ़ाने के लिए तैयार हैं, ताकि सभी को अपनी भाषा सुधारने का पूरा मौका मिल सके।