केंद्रीय मंत्री ने अपने ही मंत्रालय की योजना से ली 99 लाख की सब्सिडी- रिपोर्ट
क्या है खबर?
केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी विवादों में हैं। उन पर अपने ही मंत्रालय की एक योजना से 99 लाख रुपये की सब्सिडी लेने का आरोप है। मंत्री को ये सब्सिडी राजस्थान में खीरे की खेती के लिए दी गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस बोर्ड ने इस सब्सिडी को मंजूरी दी है, चौधरी खुद उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं।
रिपोर्ट
अजमेर स्थित विशाल खेत के लिए ली गई सब्सिडी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के अजमेर स्थित पीह में एक विशाल खेत है, जहां कृत्रिम तालाब और 4 पॉलीहाउस बने हैं। यहां साइनबोर्ड पर लिखा है, 'राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB), कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सहायता प्राप्त।' बोर्ड पर लाभार्थी का नाम भागीरथ चौधरी और सब्सिडी की राशि 99.60 लाख रुपये लिखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सामने आया है कि चौधरी को यह सब्सिडी उसी मंत्रालय की योजना से मिली है, जिसमें वह खुद मंत्री हैं।
मंजूरी
मंत्री जी के आवेदन को 14 दिन में मिली मंजूरी
साइनबोर्ड के मुताबिक, परियोजना की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये है। इसमें प्रमोटर का शेयर 49.8 लाख रुपये है। चौधरी ने HDFC बैंक से 1.49 करोड़ रुपये का लोन भी लिया था। मंत्री ने 15 अप्रैल 2025 को आवेदन किया था और सिर्फ 14 दिनों के भीतर ही उनके आवेदन को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई। हालांकि, नियम कहते हैं कि मंजूरी से पहले खेत का संयुक्त निरीक्षण होना जरूरी है।
विवाद
विवादों में क्यों है मंत्री को मिली सब्सिडी?
NHB की वेबसाइट के मुताबिक, इसकी गतिविधियों का संचालन एक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स करता है। इस बोर्ड के पदेन अध्यक्ष केंद्रीय कृषि मंत्री, जबकि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं। ऐसे में चौधरी बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष भी हैं। यहां ये मामला हितों के टकराव का बन जाता है। मंजूरी से एक महीने पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को दी गई जानकारी में चौधरी ने अपनी कृषि भूमि का जिक्र तो किया है, लेकिन परियोजना के बारे में नहीं बताया।
मंत्री का रुख
मामले पर मंत्री का क्या कहना है?
इंडियन एक्सप्रेस को चौधरी के कार्यालय के एक सहयोगी ने बताया है कि परियोजना के बारे में सरकार को जानकारी दी जाएगी। हालांकि, जब चौधरी को कुछ सवाल भेजे और यह पूछा गया था कि क्या मंत्रालय की योजना से सब्सिडी लेना हितों के टकराव का मामला है तो उनके कार्यालय ने इस बात की पुष्टि की कि ईमेल मिला है लेकिन मंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
योजना
क्या है योजना, जिसका मंत्री ने उठाया लाभ?
इस योजना का नाम मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) है और इसे 2014-15 में शुरू किया गया था। योजना के तहत, शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और 8 किस्म के फूलों की खेती के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। एक लाभार्थी को अधिकतम एक करोड़ रुपये की सब्सिडी मिलती है। योजना का उद्देश्य बड़े पैमाने पर इन उत्पादों की वाणिज्यिक खेती को बढ़ावा देना है। योजना का संचालन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) द्वारा किया जाता है।