दशकों से आदिवासियों की सेवा में जुटीं, अब मिलेगा 'पद्मश्री'; जानें कौन हैं सुनीता गोडबोले
क्या है खबर?
छत्तीसगढ़ में करीब 3 दशक से आदिवासियों की सेवा में जुटी सुनीता गोडबोले को 'पद्मश्री' पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 25 मई को राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गोडबोले को ये सम्मान देंगी। गोडबोले को उनके पति रामचंद्र गोडबोले के साथ संयुक्त रूप से ये सम्मान दिया जाएगा। रामचंद्र भी सालों से बस्तर के आदिवासियों को मुफ्त में चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। आइए सुनीता गोडबोले के बारे में जानते हैं।
शुरुआती जीवन
महाराष्ट्र के सतारा की रहने वाली हैं सुनीता
सुनीता मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा की रहने वाली हैं। उन्होंने सोशल वर्क में मास्टर्स की पढ़ाई की है। वे हफ्ते में 1-2 दिन आदिवासी बहुल गांवों में जाकर सेवा कार्य करती थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े रामचंद्र गोडबोले से हुई। सामाजिक कार्यों में साझा लगाव से दोनों को नजदीकियां बढ़ीं और शादी करने की ठानी। सुनीता ने पहले ही शर्त रख दी थी कि शादी के बाद भी समाज सेवा जारी रहेगी।
शादी
शादी के 7 दिन बाद बस्तर आए गोडबोले दंपत्ति
सुनीता और रामचंद्र ने 28 फरवरी, 1990 को शादी की। 7 दिन बाद ही दोनों बस्तर के बारसूर आ गए और आदिवासियों की सेवा का संकल्प लिया। तब से दंपत्ति ने बस्तर, बीजापुर और सुकमा के वनवासी समुदाय की सेवा में पूरा जीवन समर्पित कर दिया। सुनीता ने आदिवासी महिलाओं के बीच अहम सामाजिक कार्य किए हैं। उन्होंने महिलाओं को गर्भावस्था, पोषण की जानकारी, बच्चों की देखभाल और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया है।
शिविर
पति के साथ मिलकर लाखों आदिवासियों का किया मुफ्त इलाज
सुनीता के पति रामचंद्र पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं। दंपत्ति ने 3 दशक से भी ज्यादा समय में छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में एक लाख से ज्यादा लोगों का मुफ्त इलाज किया है। बस्तर के घने जंगलों में जहां न सड़क है, न बिजली है और न मोबाइल नेटवर्क है, वहां ये दंपत्ति सालों से लोगों की सेवा कर रहे हैं। गोडबोले दंपत्ति अपने क्लीनिक के अलावा शिविर लगाकर भी इलाज करते हैं।
पुरस्कार
जमीनी स्तर के नायकों को सरकार कर रही सम्मानित
राष्ट्रपति मुर्मू 25 मई को अलग-अलग क्षेत्रों की शख्सियतों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित करेंगी। इस दौरान कुल 131 लोगों को पुरस्कार दिए जाएंगे। इनमें 113 'पद्मश्री', 5 'पद्म विभूषण' और 13 'पद्म भूषण' शामिल हैं। भारत सरकार #PeoplesPadma पहल के तहत ये सम्मान देश के उन असली नायकों तक पहुंच रही है, जिन्होंने चकाचौंध से दूर रहते हुए जमीनी स्तर पर बिना किसी पहचान के समाज के लिए काम किया है।