महाराष्ट्र में मराठी अनिवार्यता पर हाई कोर्ट का पुराना दांव: क्या सरकार का नया फरमान टिक पाएगा?
महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में ऐलान किया है कि सभी लाइसेंस वाले ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को 1 मई तक बुनियादी मराठी आनी ज़रूरी है, नहीं तो उनके परमिट रद्द हो सकते हैं। यह कदम कई लोगों को बॉम्बे हाई कोर्ट के एक पुराने आदेश की याद दिलाता है। दरअसल, 1 मार्च 2017 को हाई कोर्ट ने इसी तरह के एक नियम को रद्द करते हुए कहा था कि राज्य सरकार इन ड्राइवरों पर इसे थोप नहीं सकती।
नियम पर ड्राइवर यूनियन और सरकार की अलग-अलग राय
ड्राइवर यूनियनों ने इस नियम का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि इससे उनके काम करने के मौलिक अधिकार पर चोट पहुंच रही है और यह उनके साथ नाइंसाफी होगी। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह नियम ड्राइवरों को यात्रियों से जुड़ने और सड़क के संकेतों को समझने में मदद करेगा। लेकिन अब जब फिर से इसे कोर्ट में चुनौती देने की बात चल रही है, तो लगता नहीं कि यह विवाद इतनी जल्दी खत्म होने वाला है।