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मराठी भाषा की अनिवार्यता: महाराष्ट्र में 4 मई से विरोध पर उतरेंगे 15 लाख ऑटो चालक
महाराष्ट्र में 4 मई से विरोध पर उतरेंगे 15 लाख ऑटो चालक

मराठी भाषा की अनिवार्यता: महाराष्ट्र में 4 मई से विरोध पर उतरेंगे 15 लाख ऑटो चालक

Apr 21, 2026
05:25 pm

क्या है खबर?

महाराष्ट्र में एक बड़े विरोध प्रदर्शन की आशंकाएं बढ़ रही हैं क्योंकि लगभग 15 लाख ऑटो और टैक्सी चालकों ने सरकार के परमिट धारकों के लिए मराठी भाषा की दक्षता अनिवार्य करने के फैसले के खिलाफ 4 मई से राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में लोगों की सहूलियत के लिए परमिट धारक ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किया है। इसके बिना उनके परमिट निरस्त किए जाएंगे।

विवाद

क्या है पूरा विवाद?

महाराष्ट्र सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की थी। उन्होंने कहा है कि 1 मई, 2026 यानी महाराष्ट्र दिवस से राज्य में सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया जाएगा। इसके तहत चालकों को मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना चाहिए। अगर कोई चालक इस भाषा में बुनियादी दक्षता नहीं दिखा पाता, तो उसका लाइसेंस को रद्द कर दिया जाएगा।

अभियान

1 मई से शुरू होगा सत्यापन अभियान

सरकार के इस आदेश के तहत महाराष्ट्र दिवस से 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) में सत्यापन अभियान शुरू किया जाएगा। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक द्वारा समर्थित नए नियमों के अनुसार, चालकों को मौखिक और लिखित परीक्षा देनी होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे स्थानीय भाषा में प्रभावी ढंग से संवाद कर सकें। प्रशासन का कहना है कि यह केवल यात्रियों की सुरक्षा और संचार में सुधार के लिए किया जा रहा है।

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विरोध

सरकार के आदेश के विरोध में उतरी टैक्सी यूनियन

राज्य की ऑटो रिक्शा और टैक्सी यूनियन इस आदेश को एक अनावश्यक बाधा के रूप में देख रही है। उनका कहना है कि यह आदेश्त एक विशिष्ट कार्यबल को लक्षित करता है। TOI के अनुसार, यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि वह इस आदेश के खिलाफ आंदोलन करेंगे, जिससे सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बाधित हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि राज्य भर में रेलवे स्टेशनों, बस डिपो, बाजारों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शनों की योजना बनाई गई है।

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योजना

पहले सौंपेंगे ज्ञापन और फिर करेंगे आंदोलन

यूनियनों के अनुसार, चालक सबसे पहले 28 अप्रैल तक परिवहन विभाग को ज्ञापन सौंपकर इस नियम को वापस लेने की मांग करेंगे। अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो 4 मई से रोजाना विरोध प्रदर्शन शुरू होंगे और सरकार द्वारा फैसले पर पुनर्विचार किए जाने तक जारी रहेंगे। यूनियनों का तर्क है कि यह आदेश भेदभावपूर्ण है और आजीविका को खतरे में डालता है, खासकर प्रवासी ड्राइवरों के लिए जो मराठी भाषा में निपुण नहीं हो सकते हैं।

बचाव

सरकार ने किया अपने आदेश का बचाव

महाराष्ट्र सरकार ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा है कि इस नियम का उद्देश्य चालकों और यात्रियों के बीच बेहतर संवाद सुनिश्चित करना और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में स्थानीय भाषा के उपयोग को बढ़ावा देना है। हालांकि, टैक्सी यूनियन के नेताओं का कहना है कि ऐप-आधारित कैब ऑपरेटरों और बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए इसी तरह की भाषा संबंधी आवश्यकताओं को सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा है। यह उनके साथ भेदभाव है।

चेतावनी

विरोध प्रदर्शन पर उतरेंगे 15 लाख चालक

मुंबई ऑटो रिक्शा चालक संघ के नेताओं ने कहा कि इस आदेश से इस क्षेत्र पर निर्भर लाखों परिवार प्रभावित हो सकते हैं और चेतावनी दी कि भाषा कौशल के आधार पर परमिट रद्द करने से गंभीर आर्थिक परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि ज्ञापन देने के बाद अगर सरकार उनकी मांग नहीं मानती है तो 4 मई से राज्य के 15 लाख से अधिक ऑटो और टैक्सी चालक विरोध प्रदर्शन पर उतरेंगे और इसकी जिम्मेदार सरकार होगी।

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