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तुकाराम मुंढे ने अस्पतालों के बिल पर उठाए सवाल, बोले- 6 रुपये की सिरिंज की MRP 57
तुकाराम मुंढे ने चिकित्सा सामानों की कीमतों और भारी मार्जिन पर सवाल उठाया है

तुकाराम मुंढे ने अस्पतालों के बिल पर उठाए सवाल, बोले- 6 रुपये की सिरिंज की MRP 57

लेखन आबिद खान
Sep 16, 2026
04:30 pm

क्या है खबर?

होटलों और रेस्टोरेंट के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चर्चा में आए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने अब चिकित्सा उपकरणों की ज्यादा कीमत का मुद्दा उठाया है। उन्होंने मेडिकल उत्पादों की खरीद कीमत और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में बड़े अंतर को सामने रखा है। मुंढे के मुताबिक, एक निजी अस्पताल ने IV सेट 11.05 रुपये में खरीदा, लेकिन उसकी MRP 325 रुपये थी। यानी दोनों कीमतों में 2,841 प्रतिशत का अंतर था।

कीमतें

सिरिंज की MRP और खरीद में 747 प्रतिशत का अंतर

मुंढे ने बताया कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पादों की खरीद कीमत और MRP में काफी बड़ा अंतर मिला है।

उदाहरण के तौर पर 6.75 की लागत वाली एक सिरिंज का MRP 57.20 रुपये मिला। ये 747 प्रतिशत ज्यादा है। इसी तरह एक कैथेटर की खरीद 29.41 में हुई, जबकि उस पर 310 रुपये MRP छपा था।

22.50 रुपये की कीमत वाली IV कैनुला 424 रुपये में बेची जाती है, जो खरीद से लगभग 19 गुना ज्यादा है।

बयान

मुंढे बोले- मरीज के पास दूसरा विकल्प नहीं

मुंढे ने कहा, 'ये ऐसी चीजें नहीं हैं, जिन्हें मरीज मर्जी से चुनकर खरीदता है। मरीज न तो कीमतों की तुलना कर सकता है, न कोई दूसरा विकल्प ढूंढ सकता है और न ही MRP पर सवाल उठा सकता है। MRP अक्सर मैन्युफैक्चरर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स तय करते हैं और यह ट्रेड प्राइस से बहुत ज्यादा अंतर पर होती है। नतीजा यह होता है कि कीमत चुकाने वाले व्यक्ति के पास ही उसे परखने के लिए सबसे कम जानकारी होती है।'

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नियम

क्या कहते हैं नियम?

चिकित्सा उत्पाद ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 (DPCO) के तहत कई जरूरी दवाओं की कीमत पर सीमा तय होती है। हालांकि, ज्यादातर मेडिकल डिवाइस और कंज्यूमेबल्स पर ऐसी कीमत सीमा लागू नहीं है।

सरकार ने पहले कोरोनरी स्टेंट और घुटने के इम्प्लांट जैसे कुछ मेडिकल उत्पादों की कीमत नियंत्रित की है।

कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन कंसंट्रेटर समेत कुछ अन्य मेडिकल डिवाइस पर भी ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित किया गया था।

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सुझाव

मुंढे ने दिए ये सुझाव

मुंढे ने केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय और नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के सामने ये मुख्य मांगें रखी हैं।

DPCO 2013 के तहत कानूनी रूप से सर्जिकल सामानों को शामिल किया जाए।

रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का विस्तार किया जाए ताकि अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए इस्तेमाल सर्जिकल सामान को व्यवस्थित, कानूनी कीमत निगरानी के दायरे में लाया जा सके।

थोक खरीद लागत और MRP के बीच प्रतिशत के अंतर पर एक स्वीकार्य सीमा तय की जाए।

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