महाराष्ट्र का धर्मांतरण कानून: 60 दिन की सूचना अनिवार्य, धार्मिक संगठनों में बढ़ी बेचैनी
महाराष्ट्र का धर्म स्वतंत्रता कानून 28 अगस्त से लागू हो रहा है। अब अगर कोई अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पहले इसकी जानकारी देनी होगी।
यह कानून जबरदस्ती, धोखाधड़ी, लालच या शादी के जरिए धर्म परिवर्तन पर रोक लगाता है। इस कानून को तोड़ने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है। अगर कोई बार-बार ऐसा करता है, तो उसे 10 साल तक की कैद का सामना करना पड़ सकता है। महाराष्ट्र उन राज्यों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जहां ऐसे ही नियम लागू हैं।
महाराष्ट्र के चर्च और बौद्ध समुदाय ने दुरुपयोग की चेतावनी दी
चर्च और दूसरे धार्मिक संगठन चिंतित हैं कि इस कानून का गलत इस्तेमाल हो सकता है। उन्हें डर है कि इससे उनकी रोजाना की प्रार्थना सभाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। दरअसल, कुछ चर्चों ने तो लोगों से ऐसे फॉर्म भरवाना भी शुरू कर दिया है, जिसमें वे यह लिख रहे हैं कि वे अपनी मर्जी से प्रार्थना सभा में आ रहे हैं।
बौद्ध समुदाय भी इस पर अपनी बात रख रहा है। उनका कहना है कि यह कानून उनके रोजाना के ध्यान और दूसरे धार्मिक अनुष्ठानों में दखल दे सकता है। वे बताते हैं कि बौद्ध धर्म में बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन ज्यादातर 14 अक्टूबर के आसपास होता है, क्योंकि यह तारीख बीआर अंबेडकर के धर्म परिवर्तन से जुड़ी है।