महाराष्ट्र में धर्म परिवर्तन पर कड़ा पहरा: 60 दिन नोटिस, 7 साल जेल और गैर-जमानती अपराध
महाराष्ट्र ने धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 2026 लागू कर दिया है। यह कानून जबरदस्ती, धोखाधड़ी या बहकावे से होने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाता है। इसका मतलब है कि किसी को गुमराह कर या गलत मंशा से शादी करके धर्म परिवर्तन करवाना अब अपराध माना जाएगा।
अब अगर कोई व्यक्ति अपना धर्म औपचारिक रूप से बदलना चाहे, तो उसे 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना देनी होगी। यह कानून 30 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद लागू हो गया।
गैर-जमानती अपराध, रिश्तेदार कर सकते हैं शिकायत
इस कानून का उल्लंघन करने पर गंभीर अपराध माना जाएगा। इसमें होने वाले अपराध गैर-जमानती होंगे और पीड़ित के करीबी रिश्तेदार भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पहली बार ऐसा अपराध करने वाले को 7 साल तक की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
दोबारा यही अपराध करने पर सजा और भी कड़ी हो जाएगी, जिसमें 10 साल तक की जेल और 7 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है। अगर यह धर्म परिवर्तन किसी नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्य के साथ किया जाता है, तो इसके लिए और भी सख्त सजा का प्रावधान है।
महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की सूची में शामिल
इस नए कानून के साथ, महाराष्ट्र उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास पहले से ही धर्म परिवर्तन विरोधी सख्त कानून हैं। इनमें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं। इन कानूनों का मुख्य मकसद लोगों को जबरन धर्म परिवर्तन से बचाना और उन्हें अपनी मर्जी से धर्म चुनने की आजादी देना है।