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अजित पवार की मौत के बाद होश में आई सरकार, 400 हवाई पट्टियों का निरीक्षण शुरू
DGCA और राज्य सरकारें करेंगी 400 हवाई पट्टी की निगरानी

अजित पवार की मौत के बाद होश में आई सरकार, 400 हवाई पट्टियों का निरीक्षण शुरू

लेखन गजेंद्र
Feb 09, 2026
10:15 am

क्या है खबर?

महाराष्ट्र के बारामती में उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पिछले महीने विमान दुर्घटना में हुई दर्दनाक मौते के बाद देशभर के 400 गैर-वायु यातायात नियंत्रक (ATC) हवाई पट्टियों की समीक्षा शुरू की गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से की जा रही राष्ट्रव्यापी समीक्षा का उद्देश्य हवाई परिचालन मानकों का एक समान सेट तैयार करना है। साथ ही, मंत्रालय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और राज्य सरकारों दोनों को शामिल करते हुए एक साझा निगरानी प्रणाली भी तैयार करेगी।

समीक्षा

400 हवाई पट्टियों पर हादसों का डर?

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, DGCA की टीमें 'A' श्रेणी के हवाई अड्डों पर सुरक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रही हैं। यहां कोई ATC नहीं है। ये हवाई अड्डे राज्यों, निजी संचालकों या उड़ान प्रशिक्षण संगठनों (FTO) की देख-रेख में हैं और भारत में ऐसे 400 हवाई पट्टियां हैं। इनमें कई का उपयोग चार्टर ऑपरेटरों, राजनीतिक उड़ानों और फ्लाइंग स्कूल करते हैं, लेकिन इनमें हवाई पट्टी के रखरखाव, बचाव सेवाओं, विमानों की आवाजाही के समन्वय के लिए मानकीकृत प्रक्रिया नहीं है।

निरीक्षण

हवाई पट्टियों में इन चीजों का होगा आकलन

अधिकारी हवाई पट्टियों के निरीक्षण अभियान के तहत बुनियादी ढांचे की कमियों, संचार सुविधाओं, अग्निशमन तैयारियों और जिले के स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय तंत्र का आकलन करेंगी। वर्तमान में, इनमें से अधिकांश अनियंत्रित हवाई अड्डे संबंधित राज्यों के स्वामित्व में हैं और नियमित DGCA की निगरानी के अधीन नहीं हैं, जिससे एक नियामक खामी उत्पन्न होती है। मंत्रालय ने इस संबंध में दिशा-निर्देशों 28 जनवरी को बारामती विमान दुर्घटना के बाद दिया था और निरीक्षण करने को कहा है।

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श्रेणी

भारत में 4 श्रेणी के हवाई अड्डे

भारत में 4 श्रेणी के हवाई अड्डे हैं, जिसमें श्रेणी 'A' के हवाई अड्डों में ATC सेवा नहीं होती। श्रेणी 'B' के हवाई अड्डे आंशिक रूप से नियंत्रित और वहां सीमित ATC या AFIS सेवाएं उपलब्ध होती हैं, जैसे छत्रपति संभाजी नगर और जलगांव। श्रेणी 'C' के हवाई अड्डे प्रक्रियात्मक ATC प्रणाली के तहत आते हैं, जहां विमानों के बीच की दूरी को बिना रडार प्रबंधित किया जाता है, जैसे पुणे। श्रेणी 'D' में मुंबई-दिल्ली जैसे हवाई अड्डे शामिल हैं।

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जानकारी

गैर-ATC हवाई पट्टियां कहां-कहां?

प्रमुख अनियंत्रित हवाई पट्टियों में महाराष्ट्र में बारामती, कराड, चंद्रपुर हैं, मध्य प्रदेश में उज्जैन, छिंदवाड़ा, बिहार में भागलपुर, बेगुसराय, राजस्थान में अलवर, उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर और सैफई, कर्नाटक में हासन शामिल है। इन सभी हवाई अड्डों पर राजनेता और बिजनेस जेट उतरते हैं।

बयान

राज्य के समन्वय से विकसित होगी प्रणाली

रिपोर्ट में वरिष्ठ विमानन अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि इस तरह की हवाई पट्टियों के लिए मौजूदा दिशानिर्देश DGCA के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं। इसलिए नियामक, राज्यों के समन्वय से, एक ऐसी प्रणाली बना रहा है, जिससे इन हवाई अड्डों की स्थिति और सुरक्षा मानकों की जानकारी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण को मिले। निरीक्षण में उड़ान सुरक्षा विभाग (FSD), विमान योग्यता निदेशालय और संचालन निदेशालय के अधिकारी शामिल हैं।

सस्ता

बुनियादी ढांचा सस्ता है

विमानन सलाहकार फर्म मार्टिन कंसल्टेंसी के संस्थापक मार्क मार्टिन बताते हैं कि दूरस्थ या कच्ची हवाई पट्टियों पर भी विंडसॉक्स, बुनियादी मौसम निगरानी, ​​CCTV कवरेज और नियमित निरीक्षण जैसी आवश्यक सुविधाएं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य अधिकारियों द्वारा मासिक सुरक्षा जांच और मौसम डेटा का दैनिक ऑनलाइन प्रकाशन, गैर-ATC हवाई अड्डों पर निगरानी में काफी सुधार लाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इन उपायों पर राज्य सरकार का प्रति पट्टी 2 लाख रुपये से अधिक खर्च नहीं आएगा।

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