मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, मां की दूसरी शादी से नहीं छिनेगी पिता की विरासत
मद्रास हाई कोर्ट ने साफ किया है कि अगर कोई विधवा दोबारा शादी करती है, तो उसके बच्चों का अपने दिवंगत पिता की संपत्ति पर विरासत का अधिकार बना रहता है। जस्टिस पीबी बालाजी ने अपने फैसले में कहा कि दोबारा शादी करने के बाद केवल विधवा ही अपनी दावेदारी खोती है, बच्चों या अन्य प्रथम श्रेणी के वारिसों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। यह मामला तब सामने आया जब एक बेटी को अपने पिता का हिस्सा मिला था, क्योंकि उसकी मां ने दोबारा शादी कर ली थी। एक रिश्तेदार ने पुराने उत्तराधिकार कानूनों का हवाला देकर इस पर सवाल उठाया था।
मद्रास हाई कोर्ट ने 2005 से पहले के बेटी के अधिकारों को बरकरार रखा
कोर्ट ने बेटी के पक्ष में अपना फैसला सुनाते हुए साफ कहा कि दोबारा शादी सिर्फ विधवा के निजी दावे को ही प्रभावित करती है। पिता का हिस्सा उनके कानूनी वारिसों, जैसे उनके बच्चों को ही मिलता है। इसलिए 2005 से पहले के कानून के तहत भी बेटी को अपने पिता की संपत्ति पर पूरे अधिकार मिलते हैं।