मद्रास हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, पति-पत्नी के सालों अलग रहने को माना क्रूरता
मद्रास हाई कोर्ट ने अभी-अभी एक अहम फैसला सुनाया है। इसके तहत शादी में कई सालों तक अलग रहना भी क्रूरता मानी जा सकती है। यह मामला एक शादी से जुड़ा है जो 22 नवंबर, 1990 को हुई थी। पत्नी ने साल 2019 में शादी खत्म करने की अपील की थी। पत्नी का आरोप था कि पति ने न तो घर का खर्च उठाया और न ही बच्चों की पढ़ाई का खर्चा दिया। उसने पति पर क्रूरता और त्याग (छोड़ देने) का आरोप लगाया था। कोर्ट ने इस बात से सहमति जताई। कोर्ट ने कहा कि जब साल 2014 से पति-पत्नी साथ नहीं रह रहे हैं और साल 2016 से वे अलग-अलग रह रहे हैं, तो यह दोनों पक्षों के लिए क्रूरता मानी जाएगी। हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने यह बात कही। इस बेंच में जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति शामिल थे।
बेटी की शादी में पति का न आना भी क्रूरता- कोर्ट
पत्नी ने यह भी बताया कि पति ने आर्थिक रूप से कोई मदद नहीं की। इतना ही नहीं वह उनकी बेटी की शादी में भी नहीं आया। कोर्ट ने माना कि पति के ऐसे बर्ताव से पत्नी को काफी मानसिक कष्ट पहुंचा होगा और इसे क्रूरता ही माना जाएगा। बच्चों की गवाही ने भी कोर्ट के फैसले का समर्थन किया। कोर्ट ने तलाक को सही ठहराते हुए कहा कि जब साल 2014 से पति-पत्नी साथ नहीं रह रहे हैं और साल 2016 से वे अलग-अलग रह रहे हैं, तो यह दोनों पक्षों के लिए क्रूरता है।