गर्भ में पल रहे बच्चे को थीं गंभीर बीमारियां, मद्रास हाई कोर्ट ने गर्भपात की अनुमति दी
मद्रास हाई कोर्ट ने एक ऐसी मां के हक में फैसला सुनाया है, जो अपने गर्भ को गिराना चाहती थी। डॉक्टरों ने गर्भ में पल रहे बच्चे में गंभीर जन्मजात बीमारियों का पता लगाया था, जिसके बाद मां ने यह फैसला लिया था।
जस्टिस पीटी आशा ने इस बात पर जोर दिया कि मां के इस फैसले का सम्मान होना चाहिए, खासकर इसलिए क्योंकि जन्म लेने के बाद बच्चे को बहुत कष्ट हो सकता है।
यह फैसला तब आया जब चेन्नई के एग्मोर में इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी और सरकारी अस्पताल की चेयरपर्सन ने पहले उस महिला की अर्जी ठुकरा दी थी। अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने अपनी राय दी थी कि बच्चे में जो न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें हैं, वे भले ही गंभीर हों, लेकिन जानलेवा नहीं हैं।
मद्रास हाई कोर्ट ने माता-पिता की राय को अहम बताया
डॉक्टरों को बच्चे में ऐसी दिक्कतें मिली थीं जिनसे उसके सोचने-समझने की शक्ति और विकास में बड़ी रुकावटें आ सकती थीं। लेकिन डॉक्टरों ने इन दिक्कतों को जानलेवा नहीं माना और गर्भपात की इजाजत देने से मना कर दिया था।
अदालत ने इस मामले में दखल देते हुए कहा कि भले ही कोई बीमारी जानलेवा न हो, फिर भी वह बच्चे के जीवन की गुणवत्ता पर बहुत गहरा असर डाल सकती है। अदालत ने साफ किया कि बच्चे को भविष्य में होने वाली पीड़ा को रोकने के लिए माता-पिता की राय को सुनना बहुत जरूरी है।