मद्रास हाईकोर्ट ने 34 साल बाद रद्द की शादी, 7 लाख रुपये गुजारा भत्ते का आदेश
मद्रास हाईकोर्ट ने सितंबर 1992 में हुई एक शादी को खत्म कर दिया। कोर्ट ने इस दौरान कहा कि किसी पत्नी से यह उम्मीद करना सही नहीं है कि वह पति के काम के लिए हर जगह उसके साथ जाए।
जस्टिस जीआर स्वामिनाथन और एमडी सुमति की डिविजन बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा, "पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह वोडाफोन के उस यादगार विज्ञापन वाले पग्ग (कुत्ते) की तरह व्यवहार करे।" दरअसल, पति काम के सिलसिले में शिवगंगा से मुंबई चला गया था और उसके बाद से यह जोड़ा 16 साल से अलग-अलग रह रहा था।
कोर्ट ने 7 लाख रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया
पति ने अपनी पत्नी पर बेवफाई का आरोप लगाया था, लेकिन कोर्ट ने उसके इस दावे को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने इससे पहले फैमिली कोर्ट के एक फैसले को पलटते हुए कहा कि आजकल यह सोचना ठीक नहीं है कि पति-पत्नी को हमेशा साथ ही रहना चाहिए। इसके साथ ही, कोर्ट ने पति को अपनी पत्नी को 7 लाख रुपये का गुजारा भत्ता देने का भी आदेश दिया।