मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 16 साल की किशोरी को दिया गर्भपात कराने का अधिकार
मद्रास हाई कोर्ट ने यौन शोषण का शिकार हुई एक 16 वर्षीय किशोरी को अपना 30 हफ्ते का गर्भपात कराने की इजाजत दी है। यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि आमतौर पर गर्भपात की कानूनी सीमा केवल 24 हफ्ते तक ही होती है। जस्टिस डी भरत चक्रवर्ती ने स्पष्ट किया कि अपने शरीर और प्रजनन से जुड़े फैसले लेना, किसी भी व्यक्ति के शारीरिक निजता के अधिकार का अहम हिस्सा है। इस मामले में किशोरी की मां ने अदालत में याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी बेटी के मानसिक आघात और दर्द को सामने रखा और सुरक्षित गर्भपात कराने की गुहार लगाई।
अदालत ने जल्दी मेडिकल बोर्ड की जांच के आदेश दिए
अदालत ने अस्पताल को तुरंत एक मेडिकल बोर्ड का गठन करने का निर्देश दिया। बोर्ड को यह सुनिश्चित करना था कि किशोरी की जान को बिना किसी खतरे के सुरक्षित तरीके से गर्भपात किया जा सकता है या नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि कागजी कार्रवाई में न उलझा जाए और जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन ऑर्डर की कॉपी के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। इसके साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों द्वारा सही प्रोटोकॉल (प्रक्रिया) का पालन किए जाने पर सुरक्षित गर्भपात को सिर्फ इसलिए नहीं रोका जाना चाहिए कि इससे कुछ साइड इफेक्ट्स (दुष्प्रभाव) हो सकते हैं।