महिलाओं के बैंक खाते खुले पर कमाई में अब भी पीछे
LXME-EY की एक ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले हर 100 रुपये पर अब 73 रुपये कमाती हैं। देश की कुल GDP में उनका योगदान 18 प्रतिशत है। रिपोर्ट में एक अच्छी बात यह सामने आई है कि 2011 में जहां सिर्फ 26 प्रतिशत महिलाओं की बैंकिंग तक पहुंच थी, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 89 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। इसका मतलब है कि अब पहले के मुकाबले ज्यादा महिलाएं आर्थिक लेन-देन से जुड़ रही हैं।
LXME-EY इंडेक्स में महिलाओं का स्कोर 28.1 प्रतिशत
हालांकि, इतनी बेहतर पहुंच के बाद भी, जिन घरों की कमान महिलाओं के हाथ में होती है, उनका ज्यादातर खर्च खाने-पीने और जरूरी चीजों पर (53.8 प्रतिशत) होता है। यह पुरुषों के घरों के मुकाबले ज्यादा है, जहां यह आंकड़ा 47.6 प्रतिशत है। ऐसे में महिलाओं के लिए बचत करना या निवेश करना मुश्किल हो जाता है। देश के म्यूचुअल फंड निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब एक चौथाई है और 28 प्रतिशत SIP खातों में भी उन्हीं के नाम हैं। अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं देर से निवेश शुरू करती हैं और छोटी रकम से ही शुरुआत करती हैं। एक तरफ जहां 69 प्रतिशत महिलाएं डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल कर रही हैं, वहीं स्मार्टफोन की कम पहुंच उन्हें इसमें पूरी तरह से जुड़ने से रोकती है। साथ ही, बहुत सारे बैंक खातों का इस्तेमाल केवल पैसे निकालने या सरकारी योजनाओं का पैसा लेने के लिए होता है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, LXME-EY विमेंस फाइनेंशियल प्रॉस्पेरिटी इंडेक्स में महिलाओं का कुल स्कोर सिर्फ 28.1 प्रतिशत है। यह दिखाता है कि वित्तीय समानता के मामले में अभी भी हमें लंबा सफर तय करना है।