तमिलनाडु में सूखे का खतरा, कावेरी से मिला 14 साल का सबसे कम पानी
इस मॉनसून में तमिलनाडु को कावेरी नदी से पिछले 14 सालों में सबसे कम पानी मिला है। आमतौर पर करीब 3.5 लाख करोड़ लीटर पानी मिलता है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा सिर्फ 1.2 लाख करोड़ लीटर रहा है। पानी की इस बड़ी कमी ने राज्य के लिए गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं।
1924 में तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर एक समझौता हुआ था। 1974-75 में जब इस समझौते के कुछ प्रावधानों की समीक्षा की गई, तब से अब तक के सबसे बुरे सालों में से यह एक है।
मेट्टूर बांध में सिर्फ 18 दिन का पानी बचा
मेट्टूर बांध में अब सिर्फ 18 दिन का पानी बचा है। पानी की कमी के चलते पिछले साल के मुकाबले धान की खेती का रकबा करीब एक लाख एकड़ तक कम हो गया है।
पानी की कमी इतनी ज्यादा है कि कई किसानों को पारंपरिक तरीकों से धान की बुवाई की जगह सीधी बुवाई (डायरेक्ट सोइंग) करनी पड़ी है।
हालात को और भी बदतर बनाने के लिए, कर्नाटक ने सितंबर के आखिर और अक्टूबर की शुरुआत में जितना पानी देना था, उससे भी कम दिया। इससे तमिलनाडु का नदी के पानी के उचित बंटवारे को लेकर संघर्ष और बढ़ गया है।