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न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की जांच कर रही समिति में बदलाव, लोकसभा अध्यक्ष ने पुनर्गठन किया
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के मामले की जांच करने वाली समिति में बदलाव

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की जांच कर रही समिति में बदलाव, लोकसभा अध्यक्ष ने पुनर्गठन किया

लेखन गजेंद्र
Feb 26, 2026
10:49 am

क्या है खबर?

दिल्ली के सरकारी आवास में बेहिसाब नकदी मिलने के मामले में फंसे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए गठित समिति में बदलाव किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को पहले से गठित 3 सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया है। इसमें अब बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर को शामिल किया जाएगा। समिति के चेयरमैन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार हैं। उनके अलावा एक वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल हैं।

सेवानिवृत्त

किसकी जगह लेंगे न्यायमूर्ति चंद्रशेखर

लोकसभा अध्यक्ष ने 12 अगस्त, 2025 को 3 सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बी वासुदेव आचार्य शामिल थे। न्यायमूर्ति श्रीवास्तव आगामी 5 मार्च को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में उनकी जगह न्यायमूर्ति चंद्रशेखर को शामिल किया गया है। यह बदलाव 6 मार्च से लागू होगा। समिति में अन्य कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब पुनर्गठित समिति जांच करेगी।

समिति

समिति को चुनौती दे चुके हैं न्यायमूर्ति वर्मा

लोकसभा के 146 सांसदों ने पिछले साल न्यायमूर्ति वर्मा पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव रखा था, जिसके बाद अध्यक्ष बिरला ने न्यायाधीश (जांच) एक्ट, 1968 की धारा 3 के तहत जांच कमेटी बनाई थी। न्यायमूर्ति वर्मा ने समिति के गठन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इस साल की शुरूआत में न्यायमूर्ति वर्मा समिति के सामने पेश हो चुके हैं।

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मामला

क्या है नकदी मिलने का मामला?

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश रहते न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास के स्टोर रूम में 14 मार्च आग लगी थी। वर्मा की अनुपस्थिति में उनके परिवार ने अग्निशमन-पुलिस को बुलाया। आग बुझाने के बाद टीम को घर से भारी मात्रा में नकदी मिली। इसकी जानकारी तत्कालीन CJI संजीव खन्ना को हुई तो उन्होंने कॉलेजियम बैठक बुलाकर न्यायमूर्ति वर्मा का स्थानांतरण इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति गठित की, जिसने न्यायमूर्ति वर्मा को दोषी ठहराया।

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