कर्नाटक: तेंदुए के खौफ से ठिठके बच्चों के कदम, सरकारी मदद भी हुई बेअसर
कर्नाटक के एनआर पुरा तालुक में मराठी कैंप के बच्चों को स्कूल जाने के लिए जंगल के रास्ते से गुजरना पड़ता है। आजकल यह रास्ता बहुत डरावना हो गया है। जुलाई में 7वीं क्लास के 3 छात्रों का तेंदुए से आमना-सामना हो गया और अगले दिन उनके माता-पिता को बाघ के पैरों के निशान भी दिखे। इसके बाद सभी 28 विद्यार्थियों ने डर के कारण 3 दिनों तक स्कूल जाना बंद कर दिया। बच्चे दोबारा स्कूल जाने तो लगे, लेकिन अभी भी उनमें डर बना हुआ है।
सरकार ने शुरू किया आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन
प्रशासन ने छोटे बच्चों के लिए एक आंगनवाड़ी केंद्र खोल दिया है और हर विद्यार्थी के आवागमन के लिए 6,000 रुपये देने की पेशकश भी की है। फिर भी खराब रास्तों और पैसों की कमी की वजह से परिवारों को बच्चों के लिए सुरक्षित सवारी नहीं मिल पा रही है। एक स्थानीय निवासी का कहना है कि उन्हें केवल अच्छी सड़कें और एक व्यवस्थित परिवहन सुविधा चाहिए, ताकि उनके बच्चे बिना डर के स्कूल जा सकें।