
चार दिन बाद भी नहीं मिला IAF का लापता विमान, जानें खोज में कौन-कौन है शामिल
क्या है खबर?
सोमवार को लापता हुए भारतीय वायुसेना के AN-32 के तलाशी अभियान को शुक्रवार को और तेज करते हुए 2 चीता हेलीकॉप्टर्स को भी खोज पर लगा दिया गया।
इसके अलावा इलाके की अच्छी जानकारी रखने वाले अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले के 5 शिकारियों को भी लापता विमान की खोज में लगाया गया है।
स्थानीय लोगों और पुलिस की भी मदद ली जा रही है।
वहीं, खराब मौसम सर्च अभियान में बाधा बन रहा है।
घटनाक्रम
उड़ाने भरने के 35 मिनट बाद लापता हुआ विमान
भारतीय वायुसेना के AN-32 विमान ने सोमवार, 3 जून को 12:25 बजे असम के जोरहाट एयरबेस से मेंचुका एयरफील्ड के लिए उड़ान भरी थी। इसमें पांच यात्री और आठ क्रू-मेंबर सवार थे।
उड़ान के 35 मिनट बाद इससे संपर्क टूट गया था। मेचुका एडवांस लैंडिंग ग्राउंड अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी सियांग जिले में स्थित है। यह चीन की सीमा के नजदीक है।
AN-32 भारतीय वायुसेना का एक ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है और इसे 1984 से इस्तेमाल किया जा रहा है।
कौन-कौन शामिल?
अभियान में सेना से लेकर ISRO तक शामिल
तभी से AN-32 विमान की खोज जारी है।
चीता हेलीकॉप्टर्स के शामिल होने से पहले 4 Mi-17 हेलीकॉप्टर्स, 3 एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर्स, 2 सुखोई-30, एक C-130 ट्रांसपोर्टर विमान और एक अनमैंड एरियल व्हीकल सर्च अभियान में लगे हुए थे।
भारतीय सेना, नौसेना और ISRO सभी से मदद ली जा रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ भी मामले की लगातार जानकारी ले रहे हैं।
इसके बावजूद अभी तक विमान के बारे में कई सुराग नहीं मिला है।
जानकारी
गांव के निवासियों ने किया धुआं देखने का दावा
वहीं, शिकारियों को दुर्गम और खतरनाक इलाकों में खोज के लिए भेजा गया है। इस बीच मोलो गांव के निवासियों ने जिस दिन विमान लापता हुआ, उस दिन एक पहाड़ से काला धुआं उठते देखने का दावा किया है। दावे की जांच हो रही है।
बयान
नदियों और जंगलों से ढंका है पूरा इलाका
AN-32 को 3,000 से अधिक घंटो तक उड़ाने का अनुभव रखने वाले एक रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारी ने BBC को बताया, "इस पूरे क्षेत्र में आसमान से केवल नदियां दिखती हैं। बाकी इलाका जंगलों से ढंका है। AN-32 बहुत बड़ा हो सकता है, लेकिन बिना किसी संकेत के इसके बारे में बस अनुमान लगाया जा सकता है।"
अभी तक इस विमान की खोज में दूसरे विमानों की 100 घंटे की उड़ान पूरी हो चुकी है, लेकिन इसका कोई सुराग नहीं मिला।
घटनाक्रम
ATC में ड्यूटी पर थीं पायलट की पत्नी
बता दें कि लापता विमान के पायलट आशीष तंवर की पत्नी संध्या भी वायुसेना में काम करती हैं और वह विमान लापता होने के समय असम के जोरहाट एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) पर ड्यूटी पर थीं।
उन्होंने अपने पति के विमान के लापता होने की घटना को बेहद नजदीक से देखा।
आशीष की मई 2015 में जोरहाट में पोस्टिंग हुई थी।
दोनों की मुलाकात यही हुईं और फरवरी 2018 में दोनों ने शादी कर ली।
इतिहास
पहले भी गायब हुआ था AN-32 विमान
जुलाई, 2016 में भी एक AN-32 विमान बंगाल की खाड़ी के ऊपर से उड़ान भरते समय लापता हो गया था। इसमें 29 लोग सवार थे।
विमान ने अंडमान-निकोबार जाने के लिए चेन्नई से उड़ान भरी थी।
लगभग तीन महीने तक चले तलाशी अभियान के बाद भी इस विमान का कोई सुराग नहीं मिला पाया था।
1984 में भारतीय वायुसेना में शामिल होने से अब तक आठ AN-32 विमान हादसों का शिकार हो चुके हैं।