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नौकरी के बदले जमीन मामला: लालू यादव, तेजस्वी-राबड़ी समेत 40 पर आरोप तय, चलेगा मुकदमा
नौकरी के बदले जमीन मामले में लालू यादव और उनके परिवार पर आरोप तय हो गए हैं

नौकरी के बदले जमीन मामला: लालू यादव, तेजस्वी-राबड़ी समेत 40 पर आरोप तय, चलेगा मुकदमा

लेखन आबिद खान
Jan 09, 2026
11:18 am

क्या है खबर?

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों की परेशानियां फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नौकरी के बदले जमीन घोटाले में यादव परिवार के सदस्यों पर आपराधिक आरोप तय किए हैं। जिन लोगों पर आरोप हैं, उनमें यादव परिवार के राबड़ी देवी, तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव, मीसा भारत और कुछ अन्य लोग शामिल हैं।

आरोप

40 लोगों पर आरोप तय, 52 बरी

कोर्ट ने यादव परिवार के सदस्यों समेत 40 लोगों पर आरोप तय किए हैं और 52 को बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा, "यादव और उनके परिवार ने एक आपराधिक गिरोह की तरह काम किया और उनकी तरफ से एक बड़ी साजिश रची गई थी। कोर्ट को लगता है कि लालू यादव ने अपने परिवार के लिए अचल संपत्ति पाने के लिए सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की साजिश रची थी।"

मामला

क्या है नौकरी के बदले जमीन का मामला?

ये मामला 2004 से 2009 के बीच का है। तब लालू रेल मंत्री थे। आरोप है कि लालू ने रेलवे में ग्रुप-डी में नौकरी के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली थी। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अक्टूबर, 2022 में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें लालू, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। पहले चार्जशीट में लालू के बेटों का नाम नहीं थे। उन्हें बाद में आरोपी बनाया गया।

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टाइमलाइन

मामले में कब-क्या हुआ? 

CBI ने मई, 2022 में इस मामले में FIR दर्ज की थी। फरवरी, 2023 में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने यादव परिवार समेत 14 लोगों को समन जारी किया था। 11 मार्च, 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लालू के परिवार समेत समेत 24 ठिकानों पर छापा मारा था और नगदी समेत कई आभूषण जब्त किए थे। हालांकि, 15 मार्च, 2023 को सभी को जमानत मिल गई थी। मामले में कई लोगों से अलग-अलग पूछताछ हो चुकी है।

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प्रक्रिया

आगे क्या होगा?

अभी कोर्ट का विस्तृत आदेश सामने नहीं आया है। जिन लोगों पर आरोप तय हुए हैं, उन पर भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा13(2) और 13(1)(d) के तहत आरोप तय किए जाएंगे। इसी आधार पर सभी के खिलाफ मुकदमा चलेगा और बहस के बाद अंतिम फैसला सुनाया जाएगा। हालांकि, इस दौरान आरोपियों के पास फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने का विकल्प भी मौजूद रहेगा। ये लगभग तय है कि आरोपी फैसले को चुनौती देंगे।

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