लक्षद्वीप ने रचा इतिहास, ULLAS की मदद से बना पूर्ण साक्षर
लक्षद्वीप से एक अहम खबर सामने आई है। केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप अब आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से साक्षर हो गया है। प्रशासक प्रफुल पटेल ने 11 अक्टूबर को इसकी घोषणा की। इस उपलब्धि के साथ लक्षद्वीप ने समाज में सभी के लिए आजीवन शिक्षा की समझ (ULLAS) कार्यक्रम के तहत पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य पूरा कर लिया है। इस सफर की शुरुआत उन 1,113 वयस्कों की पहचान से हुई थी जो पढ़-लिख नहीं सकते थे। ULLAS प्रोग्राम के तहत उन्हें खास तौर पर पढ़ाया गया। इसके बाद, जिन लोगों को प्रशिक्षित किया गया था, उन सभी ने 'बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा' (FLNAT) सफलतापूर्वक पास कर लिया।
वयस्कों को साक्षरता का दूसरा मौका देता है ULLAS
ULLAS का मुख्य उद्देश्य 15 साल और उससे अधिक उम्र के ऐसे लोगों को बुनियादी पढ़ाई, गणित और जीवन कौशल सिखाना है जो स्कूल नहीं जा पाए थे। शिक्षा मंत्रालय ने लक्षद्वीप की इस सफलता को एक मील का पत्थर बताया है। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि समुदाय के समर्थन से ही यह संभव हो पाया है। इस जीत के साथ लक्षद्वीप अब लद्दाख और मिजोरम जैसे राज्यों की कतार में शामिल हो गया है, जिन्होंने दिखाया है कि शिक्षा कैसे जीवन बदल सकती है। भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक देश के हर कोने में पूरी तरह से साक्षरता हो।