सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर फिर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की पीठ बैठेगी
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर केरल में भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामले पर सुनवाई करने जा रही है। कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ सबरीमाला पुनर्विचार मामले में सितंबर 2018 के फैसले के खिलाफ दायर कई समीक्षा और याचिका पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू करेगी। उस फैसले में कोर्ट ने 2018 में मासिक धर्म की उम्र वाली महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दी थी।
प्रवेश
सात जरूरी सवालों की जांच करेगी पीठ
बार एंड बेंच के मुताबिक, कोर्ट में नौ न्यायाधीशों की पीठ धार्मिक अधिकारों और स्वतंत्रता से संबंधित सात जरूरी कानूनी सवालों की जांच करेगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि क्या सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने सोमवार को मामले के पक्षों को 14 मार्च तक अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा है।
सुनवाई
सुनवाई 22 अप्रैल को समाप्त होगी
कोर्ट ने मामले की पैरवी करने वाले वकीलों के लिए समयसीमा तय की है। सुनवाई 22 अप्रैल को समाप्त की जाएगी। कोर्ट ने कहा, "नौ न्यायाधीशों की पीठ सबरीमाला पुनर्विचार मामले की सुनवाई 7 अप्रैल को सुबह 10:30 बजे शुरू करेगी। पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं को 7-9 अप्रैल तक सुना जाएगा। पुनर्विचार के विरोधियों को 14-16 अप्रैल तक सुना जाएगा। प्रतिवाद को 21 अप्रैल को सुना जाएगा। विद्वान एमिकस द्वारा अंतिम और समापन दलीलें पेश होंगी, जो 22 अप्रैल तक समाप्त होंगी।"
समर्थन
केंद्र ने किया पुनर्विचार याचिका का समर्थन, इन 7 मुद्दों पर होगी बहस
लाइव लॉ के मुताबिक, भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार फैसले की समीक्षा का समर्थन कर रही है। कोर्ट में जिन 7 मुद्दों पर विचार होने है, उसमें धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का दायरा, व्यक्तियों के अधिकारों और धार्मिक संप्रदायों के अधिकारों के बीच परस्पर संबंध, धार्मिक संप्रदाय के अधिकार की तुलना, नैतिकता शब्द का दायरा, धार्मिक प्रथा के संबंध में न्यायिक समीक्षा का दायरा, हिंदुओं के वर्ग का अर्थ आदि शामिल है।
फैसला
कोर्ट ने क्या दिया था 2018 में फैसला?
सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। तब कोर्ट ने उस परंपरा को पलट दिया था, जो मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाती थी। फैसले के कारण केरल में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए और दर्जनों पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं। नवंबर 2019 में, सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला सुनाया, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया।
जानकारी
एकमात्र महिला न्यायमूर्ति 2018 के फैसले के विरोध में थीं
2018 में तत्कालीन CJI दीपक मिश्रा, आरएफ नरीमन, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ समर्थन में, जबकि पीठ की एकमात्र महिला न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा विरोधी में थीं। 2019 की समीक्षा पीठ ने कहा कि सबरीमाला याचिकाएं बड़ी पीठ द्वारा सवालों का निर्धारण होने तक लंबित रहेंगी।