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केरल राज्य का नाम बदला गया, केंद्र सरकार ने लगाई मुहर
केंद्रीय कैबिनेट ने केरल राज्य का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी (फाइल तस्वीर)

केरल राज्य का नाम बदला गया, केंद्र सरकार ने लगाई मुहर

लेखन गजेंद्र
Feb 24, 2026
03:36 pm

क्या है खबर?

केरल राज्य का नाम बदल दिया गया है। अब उसे केरलम कहा जाएगा। केंद्र सरकार ने मंगलवार को 'सेवा तीर्थ' (नया प्रधानमंत्री कार्यालय) में पहली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया है। नाम बदलने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की सरकार ने केंद्र को भेजा था, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में फैसला लिया गया। अब इसे संसद के दोनों सदनों में भेजा जाएगा, जहां से पारित होने के बाद अधिसूचना जारी होगी।

परिवर्तन

चुनाव से पहले बदलेगा नाम?

केरल समेत 5 राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव की घोषणा अप्रैल-मई में हो सकती है, जिससे पहले नाम बदलने के प्रस्ताव को संसद से मंजूरी मिलने की संभावना है। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा, जो 2 अप्रैल तक चलेगा। इस बीच करीब 30 बैठकें होंगी और कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की जाएगी। संभावना है कि इसी सत्र में नाम बदलने का प्रस्ताव लाकर पास कराया जाएगा।

सहमति

जून 2024 में पारित हुआ था नाम बदलने का प्रस्ताव, तबसे लंबित था

केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत राज्य का नाम बदलकर प्रथम अनुसूची में 'केरलम' करने के लिए उपाय करने का प्रस्ताव पेश किया था, जिसे जून 2024 में पारित किया गया। उनका कहना है कि 'केरलम' मलयालम में उपयोग होता है और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी समुदायों के लिए यह मांग प्रमुख रही है। प्रस्ताव पर केरल में पक्ष और विपक्ष दोनों सहमत हैं।

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प्रस्ताव

केरल में 2 बार लाया गया था प्रस्ताव

केरल नाम बदलने का प्रस्ताव 2023 और 2024 में लाया गया और दोनों बार पारित हुआ। हालांकि, 2023 का प्रस्ताव स्थगित हुआ था। मुख्यमंत्री विजयन ने इसका कारण बताते हुए कहा था कि पहले प्रस्ताव में पहली अनुसूची और संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी भाषाओं में बदलाव की मांग की गई थी। फिर, जांच करने पर पता चला कि सुधार केरल से केरलम में केवल प्रस्ताव की पहली अनुसूची में किया था। इसलिए, नया प्रस्ताव पारित किया गया।

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मुहर

राष्ट्रपति के मुहर लगते ही बदलेगा कागजों में नाम

किसी राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया लंबी और संवैधानिक है। पहले राज्य की विधानसभा में नाम बदलने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित होना जरूरी है। इसके बाद इसे गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा, जो सभी मंत्रालयों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेगी। फिर केंद्रीय कैबिनेट में प्रस्ताव भेजा जाएगा, जहां हरी झंडी मिलने पर इसे संसद के दोनों सदनों में रखा जाएगा। संसद में पारित होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते हैं और अधिसूचना जारी कर नाम बदला जाता है।

समर्थन

भाजपा के केरल अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को दिया था समर्थन

केरल के नाम बदलने के प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) में कोई विवाद नहीं था। भाजपा ने भी इसका समर्थन किया था। इस साल जनवरी में केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री विजयन को पत्र लिखकर प्रस्ताव पर अपना समर्थन जताया था और मुख्यमंत्री के फैसले की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा कि 'केरलम' राज्य का इतिहास, भाषा और जड़ों को दर्शाता है और विरासत का सम्मान करता है।

जानकारी

पश्चिम बंगाल के नाम बदलने पर हो चुकी है आपत्ति

केरल से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2018 में राज्य का नाम सिर्फ 'बांग्ला' करने का प्रस्ताव दे चुकी हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय ने 'बांग्लादेश' से इसकी समानता को लेकर चिंता जताई, जिसके बाद इसे पारित नहीं किया गया था।

अर्थ

केरल नाम का क्या अर्थ है?

केरल नाम की उत्पत्ति को लेकर कई सिद्धांत देखने को मिलते हैं। सबसे प्राचीन संदर्भ अशोक के 257 ईसा पूर्व में द्वितीय शिलालेख में मिलता है। इसमें केरलपुत्र (केरल का पुत्र) का उल्लेख है। इसे चेरा राजवंश के संदर्भ में कहा जाता है। कुछ विद्वान केरलम शब्द को चेरम से जोड़ते हैं, जो कन्नड़ रूप है। मूल शब्द "चेर" का अर्थ "जोड़ना" से निकालते हैं और यह "चेरालम" शब्द में आता है, जिसमें "अलम" भूमि या क्षेत्र होता है।

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