केरल में आधार ने छीना बच्चों का स्कूल? 'शिक्षा का अधिकार' पर उठ गए सवाल, मंत्री ने बुलाई बैठक
केरल के शिक्षा मंत्री आधार आधारित दाखिला नियम की समीक्षा कर रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि हाल ही में दर्जनों प्रवासी बच्चों को स्कूलों से लौटा दिया गया। उनके पास दाखिले के लिए जरूरी कागजात नहीं थे। असल में, यह नियम डुप्लीकेट दाखिलों को रोकने के लिए बनाया गया था, लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि कहीं यह शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन तो नहीं कर रहा। ये कानून 6 से 14 साल के हर बच्चे को मुफ्त शिक्षा देने का वादा करता है।
एर्नाकुलम में 126 में से 88 बच्चों को लौटाया गया
सिर्फ एर्नाकुलम जिले की बात करें तो, इस साल 126 में से 88 प्रवासी बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं मिल पाया। इसकी मुख्य वजह आधार की अनिवार्यता थी। CMID जैसे संगठनों ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह इन नियमों में ढील दे। उनका मकसद है कि इन बच्चों को न सिर्फ शिक्षा मिले, बल्कि स्कूल की वर्दी, किताबें और मिड-डे मील जैसी सभी जरूरी सुविधाएं भी मिलें। दरअसल, जब स्थानीय छात्रों की संख्या घट रही है, तब केरल में लगभग एक लाख प्रवासी बच्चे हैं जो कक्षाओं को छात्रों से भरे रखने में मदद करते हैं। ऐसे में, उनका शिक्षा व्यवस्था में शामिल होना पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।