केरल हाई कोर्ट ने नवजात की हत्या मामले में उम्रकैद काट रही महिला को किया बरी, बताया सबूतों का अभाव
केरल हाई कोर्ट ने 2009 में एक नवजात शिशु की हत्या के आरोप में दोषी ठहराई गई एक महिला की उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के पास महिला के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था, जिस वजह से उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता था। अपनी अपील में महिला ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया था। उसने कोर्ट में बताया था कि उसके पति ने उसे झूठा फंसाया है।
केरल हाई कोर्ट ने सबूतों की कमी बताई
कोर्ट को इस मामले में कई कमियां मिलीं। न्यायाधीशों ने कहा कि पुलिस को कोई हथियार भी नहीं मिला और यह भी साबित नहीं हो पाया कि महिला जन्म के तुरंत बाद ही किसी को भनक लगे बिना बच्चे के शव को ठिकाने लगा सकती थी। इसके अलावा, अभियोजन पक्ष का यह दावा भी गलत साबित हुआ कि महिला अपनी गर्भावस्था को छिपाना चाहती थी, क्योंकि उसके परिवार वाले और एक पड़ोसी तक को इस बारे में पता था। अगर महिला किसी और मामले में वांछित नहीं है, तो उसे अब रिहा कर दिया जाएगा।