कश्मीरी पंडितों को ऑनलाइन मिल रही आतंकी धमकियां, क्या लौट रहा 90 का दशक?
कश्मीर घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को नई धमकियां मिली हैं। यह तब हुआ जब एक ऑनलाइन पत्र सामने आया, जिसमें कुछ खास लोगों के नाम और उनकी निजी जानकारियां दी गई हैं। दावा किया जा रहा है कि यह पत्र किसी आतंकी संगठन का है। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (KPSS) ने सुरक्षा एजेंसियों से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है। समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने कहा है कि इस मामले पर 'तुरंत, पारदर्शी और विश्वसनीय प्रतिक्रिया' होनी चाहिए।
संजय टिक्कू ने 1990 के दशक से की धमकियों की तुलना
टिक्कू ने इन धमकियों की तुलना 1990 के दशक में समुदाय को झेलनी पड़ी चुनौतियों से की है। उन्होंने कहा कि पहले धमकियां पोस्टरों, लाउडस्पीकरों और कानाफूसी के जरिए दी जाती थीं, लेकिन अब यह स्क्रीन और एन्क्रिप्टेड चैनलों के माध्यम से फैल रही हैं। उन्होंने आगे कहा, "जो कुछ हो रहा है, वह बेहद जाना-पहचाना है।" तकनीक भले ही बदल गई हो, लेकिन उनका मकसद वही है - कश्मीरी पंडितों को यह एहसास दिलाना कि उनका जन्मस्थान सशर्त है, उनकी संपत्ति पर मोलभाव हो सकता है और घाटी में उनकी मौजूदगी कुछ समय की ही है।